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गीता ज्ञान से अंतर्मन के विषाद व निराशा से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त—शशिप्रभा दीदी …

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चांपा। नगर में आयोजित “श्रीमद् भगवत गीता सार – सुखद जीवन का आधार” विषयक आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीता सार प्रवक्ता ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने कहा कि हम सभी अर्जुन की तरह जीवन के कुरुक्षेत्र में खड़े हैं, जहां धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष चल रहा है। अधर्म के रूप में काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी बुराइयाँ हमें कर्तव्य से विमुख करने का प्रयास करती हैं।

शशिप्रभा दीदी ने कहा कि अर्जुन के विषाद, निराशा और हताशा को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता ज्ञान दिया, जिससे उसकी आत्मशक्ति जागृत हुई। यही गीता ज्ञान आज के मानव को भी विषम परिस्थितियों में सामर्थ्य प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि आत्मा सतोगुणी है, जिसमें सुख, शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता समाहित हैं। आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है तथा परमात्मा की याद में स्थित होकर पुनः अपने मूल गुणों से परिपूर्ण हो जाती है।

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उन्होंने गीता के संदेश को समझाते हुए कहा कि जैसे पुराने वस्त्र के स्थान पर नया वस्त्र धारण किया जाता है, उसी प्रकार आत्मा भी शरीर रूपी वस्त्र के जर्जर होने पर नया शरीर धारण करती है। गीता में निहित अमूल्य शिक्षाओं को जब हम जीवन में आत्मसात करते हैं, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और समस्याओं, उलझनों व कठिन परिस्थितियों से पार पाने की शक्ति प्राप्त होती है।

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कार्यक्रम के आयोजक लक्ष्मीचंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन ने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में प्रवचन का लाभ लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।पूरे आयोजन में भक्तिमय व आध्यात्मिक वातावरण बना रहा, जिससे उपस्थित जनसमूह गीता ज्ञान से भावविभोर नजर आया।

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