किसान स्कूल में प्राकृतिक खेती के नवाचारों से रूबरू हुए रायगढ़ के 55 प्रगतिशील किसान …



जांजगीर-चांपा। कृषि विज्ञान केंद्र के गोदग्राम बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल का भ्रमण करने रायगढ़ जिले के 55 प्रगतिशील किसान पहुंचे। अडानी फाउंडेशन तमनार के सहयोग से आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण में किसानों ने प्राकृतिक खेती के मॉडल को नजदीक से देखा और इससे खासे प्रभावित हुए।


अडानी फाउंडेशन के कार्तिकेश्वर मालाकार एवं दिब्यानी लहरे ने बताया कि रायगढ़ जिले के 19 गांवों से आए 55 प्रगतिशील किसानों को वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह का भ्रमण कराया गया। इस दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती के साथ विकसित समन्वित कृषि प्रणाली का गहन अध्ययन किया।
किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने भ्रमण पर आए किसानों को पुरानी विलुप्त वस्तुओं के संग्रहालय, केले के रेशे से रेशा निकालने की मशीन, बड़ी बनाने की ड्रायर मशीन, जैविक पद्धति से उगाई गई छह फीट ऊंची धनिया, छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों का मॉडल, 65 से अधिक भाजियों की जानकारी, छत पर बागवानी, डेयरी, गोमूत्र इकाई, गोबर गैस संयंत्र, अंजोला, नाडेप, केंचुआ पालन एवं केंचुआ खाद इकाई, चार मंजिला सब्जी उत्पादन पद्धति, अक्षय चक्र कृषि मॉडल सहित कृषि अवशेष से रेशा निकालकर रंग-बिरंगी राखियां व कपड़ा बनाने की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
भ्रमण में तमनार ब्लॉक सहित रायगढ़ जिले के विभिन्न गांवों से आए प्रगतिशील किसानों ने किसान स्कूल में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की और इसे आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक प्रेरक पहल बताया।

भाजियों के रेशे से बने कपड़े ने किया किसानों को हैरान – भ्रमण पर पहुंचे किसानों ने पहली बार छत्तीसगढ़ की पारंपरिक भाजियों के डंठलों से निर्मित रंग-बिरंगी राखियां और कपड़े देखे। चेच भाजी, अमारी भाजी के साथ ही अलसी, केला, भिंडी और कमल के डंठल से तैयार उत्पादों ने किसानों को विशेष रूप से आकर्षित किया। किसान स्कूल के नवाचारी कृषकों की टीम द्वारा किए जा रहे इन प्रयोगों की किसानों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर किसान स्कूल के बाबूलाल यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, उर्मिला यादव, साधना यादव सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।





