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हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता: समूह की महिलाएं पलास, चुकंदर एवं पालक के पत्तों से बना रही हर्बल गुलाल…

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जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत जनपद पंचायत बलौदा की ग्राम पंचायत नवापारा (ख) लेवई की नैना महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल निर्माण कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

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  समूह की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सब्जियों एवं फूलों से सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। पलाश के फूलों से केसरिया रंग, पालक भाजी से हरा रंग तथा लाल भाजी और चुकंदर से लाल रंग तैयार किया जाता है. गुलाब, गेंदा और पलाश की पंखुड़ियां, गुलाब जल व इत्र मिलाकर पूरी तरह रसायनमुक्त गुलाल बनाया जाता है। यह गुलाल त्वचा, आंख और बालों के लिए सुरक्षित है। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जिससे त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुंचता है, जबकि बिहान की दीदियां पूरी तरह चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल तैयार कर रही हैं।

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  समूह की एफएलसीआरपी श्रीमती खिलेश्वरी नागरची ने बताया कि वे हर्बल गुलाब बनाने का कार्य पिछले कई सालों से करते आ रहे हैं। यह तो गुलाल त्वचा के लिए बिल्कुल भी हानिकारक नहीं है। गुणवत्ता और निरंतर प्रयास के कारण उन्हें इस कार्य से अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसे वे आस-पास के मार्केट में विक्रय कर करेंगे। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भारद्वाज के नेतृत्व में लक्ष्मीन, सीता, विद्या कुर्रे, कुंती देवी, बबली मरावी, बीमा भाई, प्रतिभा, रवीना और कमला खुटे उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन का कार्य सामूहिक रूप से कर रही हैं।हर्बल गुलाल निर्माण से प्राप्त आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं में सहयोग कर रही हैं। नैना महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर उभर रही है।इसके इसके साथ-साथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी महिला स्वास्थ्य सहायता समूह द्वारा हर्बल गुलाल बनाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही अपने आसपास के है बाजारों में विक्रय करने का कार्य करेंगे।

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