

चांपा। शासकीय एम.एम.आर. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चांपा में मानसिक स्वास्थ्य उन्नयन समिति के तत्वावधान में विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता एवं सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा, शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाओं और बदलती जीवनशैली के बीच यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रहा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. माधुरी सिक्का मिंज उपस्थित रहीं। मानसिक स्वास्थ्य उन्नयन समिति के संयोजक डॉ. वी.एम. दांडेकर ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया, जबकि डॉ. नीलिमा पांडे ने प्राचार्य का स्वागत किया।
मानसिक स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता का आधार – मुख्य वक्ता डॉ. माधुरी सिक्का मिंज ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व और जीवन की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं एवं समस्याओं को समझने तथा उन्हें दबाने के बजाय उचित व्यक्ति के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तनाव जीवन का सामान्य हिस्सा हो सकता है, लेकिन लगातार तनाव की स्थिति में व्यक्ति की कार्यक्षमता, एकाग्रता और व्यवहार प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में समय रहते परिवार, मित्र, शिक्षक या विशेषज्ञ से संवाद करना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के साथ विभिन्न गतिविधियां भी कराईं।
प्रतिस्पर्धा के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर जोर – डॉ. मीनाक्षी चंद्रा ने अपने व्याख्यान में वर्तमान सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थी अनेक प्रकार की अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में मानसिक रूप से स्वस्थ रहना और परिस्थितियों का सकारात्मक ढंग से सामना करना बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, तनाव को पहचानने और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।



