Uncategorized

जिला अस्पताल में बदहाल व्यवस्था, परिजनों को खुद खींचना पड़ रहा स्ट्रेचर …

img 20260425 wa00905776707217758413660 Console Corptech

जांजगीर-चांपा। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गंभीर मरीजों को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले परिजनों को वार्ड ब्वाय की मदद नहीं मिल पाती, मजबूरन उन्हें खुद ही स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर एंबुलेंस से मरीज उतारने के बाद परिजन इधर-उधर भटकते रहते हैं और लोगों से पूछते नजर आते हैं कि मरीज को किस ओर ले जाना है।

अस्पताल में अधिकांश परिजनों को वार्ड, जांच कक्ष या इमरजेंसी की सही जानकारी नहीं होती। ऐसे में मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर भटकना उनकी मजबूरी बन जाती है। यह स्थिति आए दिन देखने को मिलती है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की नजर अब तक इस समस्या पर नहीं पड़ी है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां 200 से अधिक बेड की सुविधा है। ब्लॉकों से गंभीर मरीजों को यहीं रेफर किया जाता है, जिससे रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर केस यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद मरीज को अस्पताल के भीतर ले जाने की बुनियादी व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है। परिजनों का कहना है कि कई बार वे काफी देर तक कर्मचारियों को तलाशते रहते हैं, लेकिन जब कोई मदद नहीं मिलती तो खुद ही स्ट्रेचर संभालने को मजबूर हो जाते हैं। इससे मरीज और परिजन दोनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

विडंबना यह है कि जहां एक ओर परिजन मरीजों को स्ट्रेचर पर खींचते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल कर्मी उन्हीं स्ट्रेचरों में सामान ढोते दिखाई देते हैं। यह दृश्य देखकर परिजन हैरान रह जाते हैं, लेकिन उनकी परेशानी पर कोई सुनवाई नहीं होती
इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि कभी-कभार परिजन स्ट्रेचर खींच भी लें तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है और हर समय कर्मचारी उपलब्ध रहना संभव नहीं। हालांकि, सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल में बुनियादी जिम्मेदारियां भी तय नहीं होंगी, तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज कैसे मिल पाएगा।

Related Articles