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चांपा स्टेशन पर ‘लैंड ऑफ कोसा सिल्क’ मूर्ति को लेकर विवाद, नगर की पहचान बदलने की साजिश के आरोप …

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चांपा। बरसों से कोसा–कांसा–कंचन नगरी के रूप में पहचानी जाने वाली चांपा की ख्याति पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। चांपा रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के सामने “चांपा लैंड ऑफ कोसा सिल्क” नाम लिखी मूर्ति लगाए जाने की तैयारी को लेकर नगर में तीखी चर्चा और असंतोष का माहौल बन गया है। नगरवासियों का कहना है कि इस तरह की पहचान थोपने से चांपा की पारंपरिक और ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है।

चांपा न केवल जांजगीर-चांपा जिला, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में कोसा, कांसा और कंचन की नगरी के रूप में जानी जाती रही है। ऐसे में केवल कोसा सिल्क को केंद्र में रखकर मूर्ति लगाने को लेकर नगर की जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह जानबूझकर नगर की बहुआयामी पहचान को सीमित करने का प्रयास है। नगरवासियों के बीच चर्चा है कि कहीं यह कदम कोसा–कांसा–कंचन की समृद्ध परंपरा को कमजोर करने की साजिश तो नहीं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि कांसा और कंचन को दरकिनार कर केवल कोसा सिल्क को प्रमुखता देने के पीछे आखिर किसकी मंशा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर लगने वाली मूर्ति नगर की पहचान का प्रतीक होती है। ऐसे में यदि पहचान अधूरी या एकतरफा दिखाई गई, तो आने वाले समय में चांपा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

बहरहाल, नगर की जनता यह जानना चाहती है कि “चांपा लैंड ऑफ कोसा सिल्क” नाम की मूर्ति किसके आदेश पर और किस आधार पर स्थापित की जा रही है। क्या इस निर्णय में जनप्रतिनिधियों या नगर की सामाजिक संस्थाओं से राय ली गई? या फिर यह फैसला चुपचाप ले लिया गया?
फिलहाल यह मुद्दा नगर के कई व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हो चुका है और लोग खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। नगरवासियों को अब प्रशासन और संबंधित विभाग से स्पष्ट जवाब का इंतजार है कि चांपा की सदियों पुरानी पहचान के साथ कोई समझौता तो नहीं किया जा रहा।

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