‘सनातन आपस में बैर रखना नहीं सिखाता, समाज में प्रेम और भाईचारा जरूरी’ – अनिरुद्धाचार्य …


जांजगीर-चांपा। प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चर्चित पंक्ति ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इसके स्थान पर ‘सनातन नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ कहना अधिक उचित होगा। वे जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह पहुंचे हैं। कथा के दौरान आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखी।
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ सनातन की मूल भावना – अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में सभी के कल्याण की कामना की गई है। ऋषि-मुनियों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का संदेश दिया, जिसका भाव सभी के सुखी और निरोग रहने की कामना करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान के आधार पर किसी के प्रति घृणा या बैर रखना सनातन की मूल भावना नहीं है।
मंदिरों की पुनर्स्थापना की मांग को गलत नहीं माना जा सकता – इतिहास में मंदिरों के विध्वंस से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां ऐतिहासिक रूप से मंदिर तोड़े गए हैं, वहां उनकी पुनर्स्थापना की मांग को गलत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी को आहत होने की आवश्यकता नहीं है। ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए।
500 से अधिक कथाएं, बोले- गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा कब? – गौमाता से जुड़े सवाल पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि वे अब तक 500 से अधिक कथाएं कर चुके हैं और लगातार गौसेवा व गौसंरक्षण की बात करते रहे हैं। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा आखिर कब दिया जाएगा। उन्होंने गौसंरक्षण को केवल धार्मिक विषय न बताते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी भी बताया।
‘समाज को लड़ाने वाला नहीं, जोड़ने वाला कानून चाहिए’ – यूजीसी कानून से जुड़े सवाल पर कथावाचक ने कहा कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं होना चाहिए, जो लोगों को आपस में लड़ाने या समाज में भेद पैदा करने का कारण बने। कानून सभी के लिए न्यायपूर्ण होना चाहिए और उसका उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।



