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मोदी के जन्मदिन पर विपक्ष का वार, ‘सेवा संकल्प’ के बजाय ‘वादाखिलाफी दिवस’ मनाने का नारा …

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जांजगीर चांपा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है। वहीं विपक्ष ने इसी मौके पर केंद्र सरकार की नीतियों और पिछले वर्षों के चुनावी वादों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पत्रकारवार्ता में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘बेरोजगारी दिवस, महंगाई दिवस, वादाखिलाफी दिवस और किसान धोखा दिवस’ के रूप में मनाने की बात कही।

विपक्ष का कहना है कि मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लंबे राजनीतिक कार्यकाल के बावजूद रोजगार, महंगाई, किसानों की आय और युवाओं से जुड़े कई मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। विपक्ष ने 2014 के चुनावी वादों का उल्लेख करते हुए महंगाई कम करने, रोजगार बढ़ाने, किसानों की आय दोगुनी करने और काले धन पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा।

नोटबंदी और ₹2000 के नोटों पर भी सवालविपक्ष ने नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए। ₹2000 के नोटों को वापस लेने के संबंध में RBI के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 तक इस मूल्यवर्ग के 98.12 प्रतिशत नोट बैंकिंग प्रणाली में लौट चुके थे।विपक्ष ने इसे नोटबंदी के प्रभाव को लेकर अपने सवालों के संदर्भ में उठाया और सरकार से जवाब मांगा।

महंगाई, पेट्रोल-डीजल और रुपये पर निशानापत्रकारवार्ता में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और केंद्रीय उत्पाद शुल्क को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने कहा कि महंगाई का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है।

रुपये की स्थिति को लेकर भी विपक्ष ने केंद्र सरकार से सवाल किए। 17 सितंबर 2026 को रुपया कारोबार के दौरान 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे गया और 96.10 का इंट्राडे स्तर छुआ। बाद में यह करीब 95.94 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषणों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि, मजबूत डॉलर, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे कारकों को रुपये पर दबाव से जोड़ा गया।

किसानों और युवाओं के मुद्दे – विपक्ष ने किसानों की आय, MSP और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि किसानों से किए गए वादों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके अलावा पेपर लीक, बेरोजगारी, श्रमिक अधिकार, वन अधिकार कानून और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े सवाल भी पत्रकारवार्ता में उठाए गए।

छत्तीसगढ़ में ‘मोदी की गारंटी’ पर सवालछत्तीसगढ़ को लेकर विपक्ष ने भाजपा की ‘मोदी की गारंटी’ पर भी सवाल उठाए। विपक्ष ने एक लाख सरकारी नौकरियां, 500 रुपये में रसोई गैस, अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, महतारी वंदन योजना, धान के 3100 रुपये के भुगतान, बेरोजगारी भत्ता, छात्रों के परिवहन पास और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ जैसी घोषणाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

25 साल के राजनीतिक सफर पर भी मांगा हिसाबप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में विपक्ष ने उनके राजनीतिक कार्यकाल और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। पत्रकारवार्ता में 2002 के गुजरात दंगों, मणिपुर हिंसा, संवैधानिक संस्थाओं, जांच एजेंसियों, मीडिया की स्वतंत्रता और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।

इन मुद्दों पर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और उठाए गए सवाल उसका राजनीतिक पक्ष हैं। संबंधित मामलों में सरकार और भाजपा का पक्ष अलग हो सकता है।

पत्रकारवार्ता में विपक्ष ने सरकार से पूछा—

  1. अच्छे दिन कब आएंगे?
  2. महंगाई कब कम होगी?
  3. रोजगार के वादे का क्या हुआ?
  4. किसानों की आय दोगुनी हुई या नहीं?
  5. नोटबंदी से क्या हासिल हुआ?
  6. डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर सरकार का क्या जवाब है?
  7. कितने नए रोजगार और सरकारी संस्थान बने?
  8. कितने स्मार्ट सिटी और एयरपोर्ट के लक्ष्य पूरे हुए?
  9. विदेशी निवेश से कितने रोजगार पैदा हुए?
  10. सरकारी संपत्तियों के विनिवेश का आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ा?

भाजपा जहां प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मना रही है और इसे मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष ने इसी अवसर पर सरकार की नीतियों और पुराने वादों का हिसाब मांगते हुए रोजगार, महंगाई, किसान, नोटबंदी, जीएसटी, रुपये की स्थिति और छत्तीसगढ़ की ‘मोदी की गारंटी’ जैसे मुद्दों को सामने रखा है। अब इन सवालों और आरोपों पर भाजपा तथा केंद्र सरकार की ओर से क्या जवाब सामने आता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

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