

जांजगीर-चांपा। जिला कांग्रेस कमेटी जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से पीएससी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और इससे प्रदेश के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी परीक्षा आयोजित कराने का वादा किया था, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2025 की राज्य सेवा परीक्षा के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 265 पदों के लिए मुख्य परीक्षा के बाद नियमानुसार तीन गुना यानी 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था, जबकि केवल 608 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र हुए। उन्होंने आयोग से उन 187 अभ्यर्थियों के न्यूनतम अंक नहीं आने का आधार सार्वजनिक करने की मांग की।
2024 की कॉपियों में मूल्यांकन को लेकर उठाए सवाल – कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा की कथित उत्तर पुस्तिकाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन में विसंगतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दो अभ्यर्थियों की कॉपियों में समान अथवा सही उत्तरों के बावजूद अलग-अलग अंक दिए गए हैं। उनके अनुसार प्रश्न क्रमांक 5(1), राजिम की भक्तिन माता, छत्तीसगढ़ में होम रूल लीग की स्थापना, घरेलू हिंसा में व्यथित व्यक्ति तथा बौद्ध धर्म के महाभिनिष्क्रमण से संबंधित उत्तरों में अंक देने में कथित अंतर सामने आया है। उन्होंने कहा कि सही और गलत उत्तरों को समान अंक दिए जाने अथवा एक जैसे उत्तरों में अलग-अलग अंक मिलने के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मूल्यांकन प्रक्रिया और गोपनीयता पर भी सवाल – राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 की पीएससी परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे। उन्होंने मूल्यांकनकर्ताओं की पात्रता, नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक होने सहित परीक्षा की गोपनीयता को लेकर जांच की मांग की। उन्होंने पीएससी अध्यक्ष रीता शांडिल्य की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।
1:3 अनुपात का पालन नहीं होने का आरोप – कांग्रेस नेता ने राज्य सेवा परीक्षा 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन में भी 1:3 के अनुपात का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि लगातार उठ रहे सवालों के बीच अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराना पारदर्शिता की दिशा में जरूरी कदम होगा।
कांग्रेस ने रखी ये मांगें – राजेश अग्रवाल ने सरकार और पीएससी से मांग की कि मामले के निराकरण तक साक्षात्कार स्थगित किया जाए। सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं साक्षात्कार से पहले उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे मूल्यांकन की निष्पक्षता देख सकें। साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों के अतिरिक्त अन्य अभ्यर्थियों को भी उनकी कॉपियां निशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसके साथ ही उन्होंने मूल्यांकनकर्ताओं के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने, मॉडल उत्तर जारी करने, सभी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने तथा साक्षात्कार के लिए 1:3 अनुपात का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में सरकार को पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।



