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चांपा के दीपेंद्र ने रचा इतिहास, संघर्षों को पछाड़ ADA में प्रशिक्षु वैज्ञानिक पद पर चयन …

चांपा। प्रतिभा किसी आर्थिक परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत के साथ आगे बढ़ने का जुनून हो, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इस बात को चांपा के दीपेंद्र कुमार देवांगन ने अपनी उपलब्धि से साबित किया है। मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े दीपेंद्र का चयन बेंगलुरु स्थित रक्षा मंत्रालय की प्रतिष्ठित संस्था एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) में प्रोजेक्ट असिस्टेंट (प्रशिक्षु वैज्ञानिक) पद पर हुआ है।

उनकी इस सफलता से परिवार, समाज और चांपा नगर में हर्ष का माहौल है।
दीपेंद्र, पत्रकार एवं जय जोहार छत्तीसगढ़ के संवाददाता हरि देवांगन के मंझले पुत्र हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार के सहयोग और दीपेंद्र की मेहनत ने मुश्किल परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए सफलता का रास्ता बनाया।

आर्थिक चुनौतियों के बीच जारी रखी पढ़ाई – दीपेंद्र ने 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन और गणित विषयों में अच्छे अंक हासिल किए। इसके बाद गुजरात के वडोदरा स्थित पारुल यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के दौरान भी आर्थिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गेट (GATE) परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की फीस जुटाना कठिन था। ऐसे में दीपेंद्र ने स्वाध्याय को अपना सहारा बनाया और रात-रात भर मेहनत कर पहले ही प्रयास में परीक्षा में ऑल इंडिया स्कोर 207 हासिल किया। इस उपलब्धि के आधार पर उन्होंने आईआईटी कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई का अवसर प्राप्त किया।

देश के लड़ाकू विमान विकास से जुड़ी संस्था में मिला अवसर – एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA), बेंगलुरु देश के विमानन और रक्षा अनुसंधान क्षेत्र की महत्वपूर्ण संस्था है। यह तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के विकास से जुड़ी रही है। ऐसी प्रतिष्ठित संस्था में चयन दीपेंद्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और उनके शैक्षणिक सफर का नया पड़ाव भी।

दीपेंद्र की सफलता पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, शहर अध्यक्ष सुनील साधवानी और पार्षद तमिन्द्र देवांगन सहित समाज के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें कोसा साल भेंटकर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

रिवार ने इस उपलब्धि को एकजुटता, निरंतर मेहनत और मां समलेश्वरी के आशीर्वाद का परिणाम बताया। दीपेंद्र की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित किया कि कठिन परिस्थितियां रास्ता मुश्किल जरूर बना सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से मंजिल हासिल की जा सकती है।

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