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जीवनदीप समिति की आर्थिक गड़बड़ी पर सवाल, आय से अधिक खर्च ने बढ़ाई चिंता …

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चांपा। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गठित जीवनदीप समिति की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। स्वर्गीय बिसाहूदास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सालय चांपा में जीवनदीप समिति की आय से अधिक खर्च होने का मामला सामने आया है, जिससे अस्पताल की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वर्गीय बिसाहूदास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सालय में जीवनदीप समिति की वार्षिक आय लगभग साढ़े आठ लाख रुपये बताई जा रही है। इसमें से करीब पांच लाख रुपये सिविल सर्जन मद से प्राप्त होते हैं, जबकि शेष लगभग साढ़े तीन लाख रुपये अस्पताल में विभिन्न सेवाओं और शुल्कों के माध्यम से अर्जित किए जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि समिति के अंतर्गत कार्यरत करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर ही सालाना लगभग नौ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में समिति की आय से अधिक खर्च होने के कारण अस्पताल पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों का आरोप है कि जीवनदीप समिति के माध्यम से की गई कई नियुक्तियां वास्तविक आवश्यकता के आधार पर न होकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सिफारिश पर की गई हैं। इससे न केवल समिति की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, बल्कि मरीजों की सुविधाओं और अस्पताल की मूल आवश्यकताओं पर खर्च होने वाली राशि भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि जीवनदीप समिति का उद्देश्य अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में समिति केवल वेतन भुगतान का माध्यम बनकर रह गई है। लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जीवनदीप समिति की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और संतुलन लाया जा सकेगा या नहीं।

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