



जांजगीर-चांपा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चांपा अपने अजीबो-गरीब कारनामों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कभी फर्जी शिक्षाकर्मियों से मासिक वसूली के आरोप, कभी अपात्रों को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की चर्चाएं, तो कभी शिक्षकों की मनचाही पदस्थापना और अपात्र लोगों को पदोन्नति का लाभ देने जैसे मामलों को लेकर विभाग पहले ही विवादों में रहा है। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें विद्यालयों के लिए प्रश्न पत्रों की छपाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।


ताजा मामला जिले के स्कूलों में आयोजित परीक्षाओं के लिए कक्षा पहली से लेकर कक्षा 11वीं तक के प्रश्न पत्रों की छपाई से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार इन कक्षाओं के प्रश्न पत्र जिले या प्रदेश के किसी स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस में छपवाने के बजाय बिहार राज्य के किसी प्रिंटिंग प्रेस से छपवाए जाने की चर्चा है। इस बात को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि सामान्यतः इस प्रकार के कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर या राज्य के भीतर ही प्रिंटिंग प्रेस के माध्यम से प्रश्न पत्र छपवाए जाते हैं, जिससे समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और गोपनीयता भी बनी रहे। लेकिन इस बार जिले से बाहर दूसरे राज्य में छपाई कराए जाने की बात सामने आने से कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई हैं। इधर प्रश्न पत्र छपाई के लिए अपनाई गई निविदा प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रश्न पत्र छपाई के लिए निविदा आमंत्रण की सूचना कब जारी की गई थी और इस प्रक्रिया में कितने लोगों या संस्थाओं ने निविदा प्रस्तुत की थी। सूत्रों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है।


इसके अलावा यह भी चर्चा है कि प्रश्न पत्र छपाई का कार्य किस दर पर और किस आधार पर संबंधित प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया, इस संबंध में भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रश्न पत्र छपाई जैसा कार्य बेहद संवेदनशील होता है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर हजारों विद्यार्थियों की परीक्षाएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में निविदा प्रक्रिया और छपाई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। अब इस पूरे मामले को लेकर विभाग की भूमिका पर निगाहें टिक गई हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो प्रश्न पत्र छपाई की प्रक्रिया से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।








