


जांजगीर-चांपा। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट की ओर बढ़ती दिख रही हैं। जिला अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), बीडीएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कुल 12 एमडी मेडिसिन डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ कार्यरत है। वह भी संविदा पर हैं, जबकि रेगुलर पद पर एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। नियमानुसार जिला अस्पताल में कम से कम दो एमडी मेडिसिन डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन हाल ही में एकमात्र संविदा डॉक्टर की सेवा समाप्त कर दी गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।


इस फैसले का छत्तीसगढ़ इनसर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (सीडा) ने कड़ा विरोध किया है। सीडा ने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर सेवा समाप्त किए गए डॉक्टर को बहाल करने की मांग करने की घोषणा की है। सीडा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ए.एस. चौहान ने बताया कि जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र कश्यप की संविदा सेवा 11 मई को एकतरफा नोटिस के जरिए समाप्त कर दी गई थी। संगठन का कहना है कि यह निर्णय न केवल व्यक्तिगत रूप से कठोर है, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी बेहद नुकसानदायक है।

शासन का तर्क है कि डॉ. लोकेंद्र कश्यप के सोशल मीडिया पोस्ट से सरकार की छवि धूमिल हुई है। वहीं डॉ. कश्यप ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उनके विचारों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जमीनी समस्याओं और आम जनता की कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित करना था, न कि शासन या विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाना। सीडा का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखना जनहित से जुड़ा विषय है, जिसे दंडात्मक दृष्टि से देखने के बजाय सुधार के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि एक विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवा समाप्ति से न केवल जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, बल्कि भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पोस्टिंग पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। सीडा ने मांग की है कि जनहित, राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता और चिकित्सीय सेवाओं की निरंतरता को देखते हुए डॉ. लोकेंद्र कश्यप की सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार कर उसे निरस्त किया जाए और उन्हें पुनः सेवायोजन का अवसर दिया जाए। साथ ही सोशल मीडिया आचरण को लेकर स्पष्ट विभागीय दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। गौरतलब है कि जिले में एमडी मेडिसिन डॉक्टरों की आवश्यकता जिला अस्पताल में दो, पांच सीएचसी में पांच, बीडीएम अस्पताल में एक और मेडिकल कॉलेज में चार—कुल मिलाकर 12 है। वर्तमान में केवल दो डॉक्टर कार्यरत थे, जिनमें से एक को सेवा से हटा दिया गया। शेष डॉ. आलोक मंगलम का मेडिकल कॉलेज में अध्यापन के लिए चयन हो चुका है और उन्हें प्रदेश में कहीं भी पदस्थ किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में जांजगीर-चांपा जिला पूरी तरह एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ विहीन हो सकता है।
इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। जिला अस्पताल जांजगीर में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज ओपीडी में और 250 से अधिक गंभीर मरीज आईपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिनमें लगभग आधे मरीज मेडिसिन विभाग से संबंधित होते हैं। वहीं क्रिटिकल केयर यूनिट में तीन वेंटिलेटर सहित कुल 20 बेड संचालित हैं, जहां 24 घंटे मेडिसिन विशेषज्ञ की आवश्यकता रहती है। बेड लगभग हमेशा भरे रहते हैं और गंभीर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते कई मरीजों को उच्च केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवा समाप्ति से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। आमजन और चिकित्सक संगठन दोनों ही इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।





