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समय पर संवाद और संवेदनशीलता से रोकी जा सकती है आत्महत्या …

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जांजगीर-चांपा।  शासकीय टी.सी.एल. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जांजगीर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने तथा आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माधुरी तिग्गा तथा डॉ. इंदु साधवानी ने विद्यार्थियों से मानसिक तनाव, अवसाद और निराशा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समय पर किसी व्यक्ति की परेशानी को समझना, उससे संवाद करना और आवश्यकता पड़ने पर उचित मदद उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।

खुलकर बात करना और ध्यान से सुनना जरूरीवक्ताओं ने आत्महत्या रोकथाम के प्रमुख उपायों में खुले संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मन में चल रही परेशानियों, तनाव या निराशा को परिवार, मित्रों अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करने से मानसिक बोझ कम किया जा सकता है। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति तनाव या अवसाद के संकेत दे रहा हो तो उसकी बात बिना किसी पूर्वाग्रह के ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। उसकी समस्याओं को समझते हुए सहानुभूति के साथ बातचीत कर समाधान तलाशने का प्रयास किया जाना चाहिए

काउंसलर और मनोचिकित्सक से मदद लेने में न करें संकोचकार्यक्रम में पेशेवर मदद के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्राध्यापकों ने कहा कि अत्यधिक मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में काउंसलर, मनोचिकित्सक अथवा उपलब्ध हेल्पलाइन की सहायता लेने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए। समाज में यह गलत धारणा है कि मनोचिकित्सक या काउंसलर के पास केवल मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ही जाता है। इस भ्रम को दूर करने की आवश्यकता है, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते विशेषज्ञ से सलाह ले सके।

सकारात्मक जीवनशैली से मजबूत होता है मानसिक स्वास्थ्यविद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार तथा परिवार और मित्रों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए प्रेरित किया गया। प्राध्यापकों ने कहा कि सकारात्मक और सहयोगी माहौल व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में कहा गया कि समय पर किया गया संवाद, संवेदनशील व्यवहार और सही मार्गदर्शन किसी व्यक्ति को निराशा के दौर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापकगण सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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