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शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रबोध से ही सशक्त होगा भारत – अमर सुल्तानिया …

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जांजगीर-चांपा। महाराणा शिक्षण समिति, नरियरा द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर, नरियारा का वार्षिक उत्सव भारतीय संस्कृति, मूल्य-आधारित शिक्षा और सामाजिक सहभागिता के संदेश के साथ गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, सेवा-भाव और चरित्र निर्माण के मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी अमर सुल्तानिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि अमर सुल्तानिया ने कहा कि “सरस्वती शिशु मंदिर केवल विद्या नहीं देतीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा प्रदान करती हैं। यहां शिक्षा भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रबोध से जुड़कर व्यक्तित्व निर्माण का आधार बनती है।” उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा की है जो बच्चों को सक्षम नागरिक के साथ-साथ सुसंस्कृत मानव भी बनाए।
अमर सुल्तानिया ने कहा कि “सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षा पद्धति में अनुशासन, सेवा, सहकार और संस्कार का जो समन्वय है, वही भारत की आत्मा है। यदि बाल्यावस्था से ही बच्चों में ये मूल्य विकसित हों, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होगा।”
उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का मौन साधक बताते हुए कहा कि शिक्षक ही बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करते हैं। साथ ही अभिभावकों से आह्वान किया कि वे विद्यालय और गुरुजनों के साथ समन्वय बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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इस अवसर पर महाराणा शिक्षण समिति, नरियरा के अध्यक्ष देवभूषण सिंह, संस्थापक सचिव शत्रुहनलाल राठौर, कोषाध्यक्ष नंदलाल पटेल, सहसचिव युगल कुमार महिपाल, सदस्य सत्यवान साव, बसंत यादव, अन्नपूर्णा साहू, कावेरी बाई निर्मलकर, अविनाश सिंह, संजय सिंह (पप्पू) सहित प्रधान पाठक राजेन्द्र कुमार साव, ज्ञाना दीदी, शिक्षकगण शीला साहू, प्रमिला महंत, सविता महंत, शीतला साहू, उषा निर्मलकर, प्रिया निर्मलकर तथा बड़ी संख्या में पालकगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर के मूल आदर्शों के अनुरूप शिक्षा और संस्कार की समन्वित धारा को सशक्त संदेश देते हुए संपन्न हुआ।

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