Uncategorized

गीता ज्ञान यज्ञ में परमात्मा के सत्य स्वरूप का हुआ भावपूर्ण वर्णन — शशिप्रभा दीदी

img 20260131 wa00064066691920394784623 Console Corptech

चांपा। लक्ष्मी टाइपिंग, हजारी गली स्थित अम्बे रेसिडेंसी में आयोजित श्रीमद् भगवत गीता सार – सुखद जीवन का आधार ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन प्रवक्ता राजयोगिनी तपस्विनी ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने परमात्मा के गीता में वर्णित सत्य स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परमात्मा परम सत्य है, अणु से भी सूक्ष्म, आदित्य वर्ण, अचिंत्य एवं ज्योति स्वरूप है।

दीदी ने कहा कि गीता के वचनों के अनुसार जब-जब धर्म की अति ग्लानि होती है, तब-तब भगवान इस धरा पर अवतरित होकर सत्य ज्ञान के माध्यम से मानवता की सद्गति करते हैं। वर्तमान समय कलयुग के उन सभी लक्षणों से परिपूर्ण है, जिनका उल्लेख गीता में किया गया है, और यही संकेत है कि परमात्मा स्वयं आकर मानव को ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा का स्वरूप ज्योति स्वरूप है, जिनका तेज ऐसा है मानो हजारों सूर्य एक साथ आकाश मंडल में उदित हो जाएं।
शशिप्रभा दीदी ने गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि परमात्मा इस संपूर्ण सृष्टि के बीज रूप हैं और 11वें अध्याय के 32वें श्लोक में स्वयं को “कालों का काल महाकाल” कहा है। जब हम उन्हें सच्चे मन से याद करते हैं, पुकारते हैं, तो वे तुरंत सहायता के लिए उपस्थित होते हैं। इसलिए प्रत्येक आत्मा का कर्तव्य है कि वह अर्जुन की भांति परमात्मा को अपनी बुद्धि और चित्त समर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चले।

कार्यक्रम आयोजक लक्ष्मीचंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन ने उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

Related Articles