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पोरा बाई नकल प्रकरण में बड़ा फैसला: अपील में चार दोषियों को 5 वर्ष का कठोर कारावास …

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जांजगीर–चांपा। जिले के बहुचर्चित पोरा बाई नकल प्रकरण में द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी.आर. पटेल के न्यायालय में हुई अपील की सुनवाई के बाद छात्रा पोरा बाई सहित फूलसाय नृशी, एस.एल. जाटव एवं दीपक जाटव को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

यह मामला वर्ष 2008 का है, जब बिर्रा हायर सेकेंडरी परीक्षा में दस्तावेजों में हेराफेरी एवं नकल का गंभीर मामला सामने आया था। पोरा बाई ने कक्षा 12वीं की परीक्षा में 500 में 484 अंक प्राप्त कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान हासिल किया था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि उत्तर पुस्तिका की लिखावट छात्रा की नहीं थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जांच प्रारंभ की गई, जिसके बाद बम्हनीडीह थाने में अपराध दर्ज किया गया। प्रकरण में चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा की अदालत में प्रस्तुत किया गया था, जहां वर्ष 2020 में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था।

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इसके विरुद्ध अभियोजन पक्ष द्वारा अपील दायर की गई, जिस पर अब द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए दोष सिद्ध माना और सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि उन सभी मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी अपराध किया है, जो ईमानदारी से पढ़ाई कर आगे बढ़ना चाहते हैं।
इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और आम जनता में व्यापक चर्चा है, वहीं इसे नकल और फर्जीवाड़े के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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