

जांजगीर-चांपा। अकलतरा क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं मिलने से किसान इन दिनों गहरी उहापोह की स्थिति में हैं। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की बोनी का समय आ चुका है, लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसान असमंजस में पड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग की नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि धान की खेती करें या नहीं।


किसानों ने बताया कि जहां जांजगीर क्षेत्र की नहरों में इन दिनों भरपूर पानी दिया जा रहा है और नहरें लबालब चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर अकलतरा साइड की नहरें सूखी पड़ी हैं। जांजगीर क्षेत्र के किसान धान की बोनी शुरू कर चुके हैं, जबकि अकलतरा के किसान केवल इंतजार करने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग और शासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अकलतरा क्षेत्र की नहरों में पानी दिया जाएगा या नहीं। यदि समय रहते जानकारी मिल जाती तो किसान उसी अनुसार धान बीज, खाद और अन्य कृषि आदानों की खरीदी कर पाते। लेकिन विभाग की अनिश्चितता के कारण किसान मानसिक तनाव में हैं और खेती की तैयारी प्रभावित हो रही है।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार और सिंचाई विभाग की अस्पष्ट नीति के चलते उन्हें लगातार उलझाया जा रहा है। यदि जल्द ही नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की फसल का समय निकल जाएगा, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र पानी नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

50 फीसदी रकबे में ही हो पाती है सिंचाई – गौरतलब है कि अकलतरा ब्लॉक में नहरों के माध्यम से केवल लगभग 50 फीसदी कृषि रकबे में ही सिंचाई हो पाती है। शेष 50 फीसदी क्षेत्र में नहर का जलस्तर नीचे होने के कारण पानी नहीं पहुंच पाता, जिससे कई किसान खेती से वंचित रह जाते हैं। क्षेत्र में नहरों का जाल तो पर्याप्त है, लेकिन सिंचाई सुविधा का पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
किसानों ने मांग की है कि अकलतरा क्षेत्र की नहरों में जल्द से जल्द पानी छोड़ा जाए और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि वे समय पर धान की बोनी कर सकें और संभावित नुकसान से बच सकें।









