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संस्कार और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत रहा का सप्तशक्ति संगम व वार्षिकोत्सव समारोह …

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जांजगीर-चांपा। जिले के ग्राम पचोरी स्थित ग्राम भारती सरस्वती शिशु मंदिर में शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। प्रातः सप्तशक्ति संगम तथा इसके पश्चात विद्यालय का वार्षिकोत्सव समारोह–2026 आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया।
प्रातः आयोजित सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम में समाज, परिवार, शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर सारगर्भित विचार रखे गए। वक्ताओं ने विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमुदाय को संस्कारयुक्त जीवन, अनुशासन, कर्तव्यबोध एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि सशक्त चरित्र निर्माण भी है।

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इसके उपरांत दोपहर 12 बजे विद्यालय का वार्षिकोत्सव समारोह प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जनपद पंचायत बम्हनीडीह की सभापति श्रीमती शिखा राठौर रहीं, जबकि अध्यक्षता ग्राम पंचायत पचोरी की सरपंच श्रीमती सुलोचना रमेश कर्ष ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सरपंच मुड़पार श्री मुरारीलाल राठौर एवं सरस्वती शिशु मंदिर चांपा के प्राचार्य श्री अश्वनी कश्यप उपस्थित रहे।
वार्षिकोत्सव में विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा देशभक्ति गीत, संस्कार आधारित नाटिकाएं, लोकनृत्य एवं प्रेरणादायी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा, माता-पिता सम्मान, सामाजिक कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम का प्रभावी संदेश दिया गया।

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अतिथियों ने अपने उद्बोधन में सरस्वती शिशु मंदिर की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विद्यालय आज के भौतिकतावादी युग में भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति और संस्कारों को जीवंत बनाए हुए हैं। यह संस्थाएं समाज को सशक्त दिशा देने का कार्य कर रही हैं।
विद्यालय प्रबंधन समिति ने बताया कि दोनों कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किए गए थे। आचार्य-दीदी, विद्यालय परिवार, ग्राम पचोरी शिक्षण समिति एवं ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वर्गीय श्री गोरेलाल पाण्डेय (गुरुजी) की संस्कारमयी परंपरा आज भी विद्यालय की गतिविधियों में जीवंत दिखाई देती है।
समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामवासी, अभिभावक एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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