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भीमा तालाब के अस्तित्व पर संकट! संरक्षण की मांग को लेकर जांजगीर में उठेगी जनआंदोलन की आवाज …

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जांजगीर-चांपा।  शहर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर भीमा तालाब के संरक्षण को लेकर अब जनआंदोलन की तैयारी की जा रही है। तालाब के अस्तित्व को सुरक्षित रखने, साफ-सफाई कराने और इसके संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग को लेकर ‘भीमा तालाब बचाओ अभियान समिति’ के तत्वावधान में 14 अक्टूबर को संभावित रूप से जनआंदोलन आयोजित किया जाएगा। समिति का कहना है कि इस पहल के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान भीमा तालाब से जुड़े संरक्षण के मुद्दे की ओर आकर्षित किया जाएगा।

भीमा तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि जांजगीर शहर की प्राकृतिक धरोहर और स्थानीय जनभावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसका संरक्षण करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक जलस्रोतों की अनदेखी से उनकी उपयोगिता और पहचान प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय रहते इनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

भीमा तालाब बचाओ अभियान समिति ने नगरवासियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों से इस जनहित के मुद्दे पर एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की है। समिति के अनुसार, जनभागीदारी के माध्यम से तालाब की साफ-सफाई, संरक्षण और उसके अस्तित्व को सुरक्षित रखने की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।
अभियान का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि भीमा तालाब के संरक्षण के लिए शासन-प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने की दिशा में प्रेरित करना भी है। समिति ने कहा कि प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन और शहर की विरासत को बचाए रखने के लिए आवश्यक है।

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तारीख, समय और स्थान की आधिकारिक घोषणा बाकी
समिति ने नगरवासियों से अपील की है कि वे भीमा तालाब बचाओ अभियान का समर्थन करें और इस जनहित के प्रयास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। हालांकि, प्रस्तावित जनआंदोलन की अंतिम तिथि, समय और स्थान की आधिकारिक जानकारी अभी जारी नहीं की गई है। समिति की ओर से विस्तृत कार्यक्रम की सूचना शीघ्र जारी किए जाने की बात कही गई है।
भीमा तालाब बचाओ अभियान समिति, जांजगीर ने उम्मीद जताई है कि शहरवासी इस पहल में साथ आएंगे, ताकि ऐतिहासिक जलस्रोत को सुरक्षित रखने की मांग व्यापक जनसमर्थन हासिल कर सके।

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