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धान बिक्री: बैंक में नही पर्याप्त पैसा,किसानों को भुगतान का लोचा …

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जांजगीर-चांपा। धान खरीदी के बाद किसानों को इसके पैसे के भुगतान के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के द्वारा अभी से आनाकानी शुरू की जा रही है। किसानों को मात्र 25 हजार रुपए भुगतान का हवाला दिया जा रहा है। इसके चलते किसान बैंकों के चक्कर काटने मजबूर हो रहे हैं। कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें उन्हें अपने घर में शादी विवाह या अन्य आयोजनों के लिए बड़ी रकम की जरूरत पड़ रही है ऐसे किसानों को भी मात्र 25 हजार रुपए का भुगतान किया जा रहा है। जिसके चलते उन्हें बैंक में बड़ी रकम होने के बाद भी कर्ज से पैसे लेने पड़ रहे हैं। कुछ इसी तरह की परेशानी से चांपा के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में एक किसान को जूझना पड़ा। दरअसल, अफरीद निवासी अजय राठौर का चांपा की शाखा में अकाउंट है। उसे 35 हजार रुपए की सख्त जरूरत थी। क्योंकि उसे अपनी माता जी के इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। इस वजह से वह अपने अकाउंट से 35 हजार रुपए का विड्राल फार्म भरा था। लेकिन जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा के कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें केवल 25 हजार रुपए ही भुगतान किया जाएगा।

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अधिक रकम के लिए ब्रांच मैनेजर से अप्रूवल लेने होंगे कहा। लेकिन इस दौरान सोमवार को चांपा का ब्रांच मैनेजर बैंक में मौजूद नहीं थे। इस कारण खाताधारक को भटकना पड़ रहा था। कि उन्हें केवल 25 हजार रुपए ही भुगतान किया जाएगा।उसने अपने परिचितों को फोन लगवाया और सीधे नोडल अफसर से संपर्क किया गया। नोडल अफसर ने आखिरकार खाताधारक की पहल की और उक्त किसान को 35 हजार रुपए का भुगतान किया गया।

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खरीदी केंद्रों में आगे और विकराल स्थिति निर्मित होने का है अंदेशाअभी धान खरीदी की शुरुआती दौर है तब तो यह हाल है। आगे जब लाखों किसान पैसे लेने बैंक जाएंगे तो कैसी स्थिति निर्मित होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसे नहीं होते। प्रत्येक शाखाओं को एक निर्धारित रकम एसबीआई के चेस्ट ब्रांच से उपलब्ध कराई जाती है। जिसमें प्रत्येक किसानों को मात्र 25-25 हजार रुपए दिया जाता है। इसके चलते बैंक प्रबंधकों को भी पैसों की समस्या से दो-चार होना पड़ता है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में पर्याप्त पैसे नहीं होते, इसके चलते किसानों को एक लिमिट में ही भुगतान करना पड़ता है। यदि एक ही किसान को बड़ी रकम दे दी जाए तो अन्य किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते लिमिट तय की जाती है -अमित साहू, नोडल अफसर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक

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