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लच्छीबंध तालाब मामले में सीएमओ का हास्यास्पद कारनामा, तालाब को निजी बताकर साफ-सफाई और नाली के पानी को जाने से रोकने के पक्ष में नहीं …

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चांपा। शहर के लच्छीबंध तालाब में नाली का पानी जाने के मामले में कार्रवाई करने के बजाय उसे निजी बताकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट गाइड लाइन है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी जलस्रोत या निस्तारी तालाब के स्वरूप को बदला नहीं जा सकता साथ ही तालाब के संरक्षण और बेजाकब्जा के मामले में उचित कदम उठानाा चाहिए।खास बात यह है कि नगरपालिका सीएमओ सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन से या तो अंजान है या फिर जानबुझकर मामले को तूल दे रहे हैं।

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एक समय शहरवासी तालाब की साफ सफाई को लेकर विरोध में खड़े हुए थे और मामला मीडिया में गरमाया तो जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए तालाब पाटने के कार्य को न केवल रूकवाया, बल्कि जनसहयोग से इस निस्तारी तालाब का गहरीकरण और नगरपालिका के जरिए साफ सफाई कराई गई। इस बीच नगरपालिका में कई प्रशासक आए और चले गए, लेकिन वर्तमान में पदस्थ नगरपालिका के अफसर का गैर जिम्मेदारीपूर्ण बयान हास्यास्पद है।

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नगरपालिका सीएमओ भोला सिंह ठाकुर निस्तारी तालाब या जलस्रोतों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन को नजर अंदाज करते हुए तालाब को निजी बताकर साफ सफाई कराने और नाली के पानी को तालाब में जाने से रोकने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।

शर्म आना चाहिए नपा अधिकारी को – लोगों का कहना है कि लच्छीबंध तालाब में महिला-पुरूष सहित सैकडों लोग रोजाना निस्तार करते है।इसे ध्यान में रखते हुए नाली का पानी जो तालाब में आ रहा है उसे तत्काल बंद कराना चाहिए।लेकिन इस ओर ध्यान नही  देने से नगर में उनके प्रति रोष देखा जा रहा है और नगर पालिका के प्रति तरह तरह की चर्चा हो रही है

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