Uncategorized

गौरव ग्राम सिवनी-नैला में श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस संपन्न …

img 20241211 wa006315640354367529436 Console Corptech

जांजगीर-चांपा। गौरव ग्राम सिवनी नैला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से ओत-प्रोत पौराणिक कथाओं का श्रवण किया। कथा वाचक आचार्य प्रवीण मिश्रा ने गज-ग्राह, वामन अवतार, समुद्र मंथन और कृष्ण जन्मोत्सव की अद्भुत कथाओं से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

WhatsApp Image 2025 10 13 at 10.02.11 Console Corptechmahendra Console Corptech

गजेंद्र नामक हाथी के ग्राह (मगरमच्छ) के चंगुल में फंसने की कथा सुनाते हुए आचार्य जी ने भगवान विष्णु की कृपा और भक्त के प्रति उनकी रक्षा भावना का उल्लेख किया। इस कथा ने संकट के समय भगवान पर विश्वास का महत्व बताया।असुर राजा बलि से भगवान विष्णु द्वारा तीन पग भूमि मांगने की कथा सुनाई गई। वामन अवतार के माध्यम से दान और समर्पण का संदेश दिया गया।समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों की कथा ने जीवन में सहयोग और त्याग का महत्व बताया। भगवान शिव द्वारा हलाहल विष के पान को सृष्टि की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक बताया गया।कथा के अंत में भगवान कृष्ण के जन्म की लीला का वर्णन किया गया। मथुरा में जन्म और गोकुल आगमन की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।आचार्य प्रवीण मिश्रा ने सनातन धर्म और संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शैली है। उन्होंने युवाओं को आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने और गौ, गंगा तथा गीता के महत्व को समझने का आह्वान किया।

rajangupta Console Corptech

उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, परोपकार और साधना को आत्मसात करना ही धर्म का सच्चा पालन है। साथ ही, सनातन धर्म के सिद्धांतों के माध्यम से विश्व शांति स्थापित करने का संदेश दिया।गौरव ग्राम सिवनी नैला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आयोजन के लिए पूरे पंडाल को गुब्बारों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे माहौल अत्यंत उत्साहपूर्ण और दिव्य हो गया।

कथा का मुख्य आकर्षण कृष्ण जन्मोत्सव- भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए व्यास आचार्य प्रवीण मिश्रा ने कंस के अत्याचारों और माता देवकी-वसुदेव के त्याग को प्रस्तुत किया। जब भगवान कृष्ण का मथुरा के कारागार में जन्म हुआ, तो पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा।गोकुल में भगवान कृष्ण के आगमन और बाललीलाओं की झलक ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति ने दिव्य कथा के साथ इस अद्भुत क्षण का आनंद लिया।भव्य सजावट और आयोजन – कृष्ण जन्मोत्सव की दिव्यता को बढ़ाने के लिए पंडाल को गुब्बारों, फूलों और लाइटिंग से सजाया गया। हर कोने में श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई गईं। श्रद्धालुओं ने आयोजन स्थल पर सजावट की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

आयोजकों की विशेष भूमिका- कार्यक्रम के आयोजक रामनारायण एवं सुनीता वस्त्रकार ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष प्रयास किए। उनकी कड़ी मेहनत और श्रद्धा के कारण यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।

श्रद्धालुओं का उत्साह- भगवान कृष्ण के जन्म के उत्सव ने पंडाल में उपस्थित हर व्यक्ति को भक्ति और आनंद से भर दिया। कथा और सजावट ने श्रद्धालुओं को ऐसा महसूस कराया मानो वे स्वयं गोकुल में भगवान के आगमन का साक्षी बने।

Related Articles