सोशल मीडिया पर सवाल उठाना पड़ा भारी, NHM के MD मेडिसिन डॉक्टर को हटाने पर मचा घमासान …




जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत जिला अस्पताल में पदस्थ MD मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र कश्यप को पद से हटाए जाने के बाद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। डॉ. कश्यप ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जमीनी सच्चाइयों को सोशल मीडिया पर उठाने की “सजा” दी गई है, जबकि उनके खिलाफ न तो कोई निष्पक्ष जांच हुई और न ही उनका पक्ष गंभीरता से सुना गया।


डॉ. कश्यप के अनुसार, करीब एक सप्ताह पूर्व उन्हें व्हाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजकर उनके फेसबुक पोस्ट पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने अपने जवाब में स्पष्ट किया था कि उनके पोस्ट किसी सरकार या शासन के विरोध में नहीं थे, बल्कि जिला अस्पताल और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाने का प्रयास थे।

तीन पोस्ट, जिन पर मचा बवाल
पहला मामला:
एक महिला मरीज को हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी की जरूरत थी। परिजनों ने जब अलग-अलग अस्पतालों से संपर्क किया तो इलाज के बदले अतिरिक्त पैसों की मांग की गई। इस पीड़ा को उन्होंने पोस्ट के जरिए सरकार के संज्ञान में लाने की कोशिश की।
दूसरा मामला:
एक धार्मिक व्यक्ति द्वारा जनसंख्या बढ़ाने संबंधी बयान पर उन्होंने अपनी राय रखी और लिखा कि जब आज भी स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, तब अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि से हालात और बिगड़ेंगे।
तीसरा मामला:
उन्होंने जिला अस्पताल में दवाइयों की भारी कमी, मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने की मजबूरी और फंड संकट का मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पत्र कई महीनों से अस्पताल परिसर में लगा हुआ है।
स्पष्टीकरण के बावजूद कार्रवाई – डॉ. कश्यप का कहना है कि उन्होंने अपने जवाब की प्रतिलिपि रायपुर स्थित NHM कार्यालय और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी सौंपी थी। इसके बावजूद उन्हें “गंभीर कदाचार” और “सरकार विरोधी पोस्ट” का हवाला देते हुए सेवा से हटा दिया गया।
जिले का इकलौता MD मेडिसिन विशेषज्ञ – सूत्रों के मुताबिक, डॉ. लोकेंद्र कश्यप जांजगीर-चांपा जिले में NHM के अंतर्गत कार्यरत एकमात्र MD मेडिसिन विशेषज्ञ थे। उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 140 से 150 मरीज आते थे और करीब 60 भर्ती मरीजों का राउंड भी वे नियमित रूप से लेते थे। इसके अलावा वे दिव्यांग प्रमाण पत्र निर्माण और अमरनाथ यात्रा के लिए मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। डॉ. कश्यप बताते हैं कि पिछले वर्ष उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया था और उनकी वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (PAR) भी उत्कृष्ट रही है।
राजनीतिक दबाव के आरोप – सूत्रों का दावा है कि कुछ स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों के दबाव में यह कार्रवाई की गई, हालांकि इस संबंध में अब तक प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर – डॉ. कश्यप का कहना है कि जिला अस्पताल में आज भी दवाइयों की किल्लत, सीटी स्कैन मशीन बंद रहने और कई जरूरी जांच सुविधाएं प्रभावित हैं। उन्होंने इन्हीं मुद्दों को उठाकर मरीजों के हित में आवाज बुलंद की थी।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठाना अब “कदाचार” की श्रेणी में आने लगा है?




