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अक्सर टॉप टेन में स्थान बनाकर बच्चों ने सरस्वती शिशु मंदिर की अच्छी शिक्षण व्यवस्था पर लगाई मुहर …

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जांजगीर-चांपा। मां की कोख से जन्मे शिशु की पहली पाठ मां से ही सिखता है। फिर थोड़ा बड़ा होकर अक्षर ज्ञान के लिए विद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है। यहीं से उसका भविष्य तय होता है, कि बच्चा किस तरह के स्कूल में तालीम लेने पहुंचा है। आज के परिवेश में पूरी तरह से शिक्षा व्यवसायीकरण हो गया है। इतने खर्चने के बाद भी बालक को यदि प्राइमरी कक्षा में भी अक्षर ज्ञान न हो तो फिर क्या कहा जा सकता है। इसमें भी बच्चे के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा तो बेइमानी है। कुछ इसी तरह का हाल आज स्कूलों का है। लेकिन चांपा शहर में एक विद्यालय ऐसा भी है, जहां हिन्दी, अंग्रेजी के साथ ही बच्चे के सर्वांगीण विकास का बीड़ा स्कूल ने उठाया है।

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हम बात कर रहे हैं चांपा के सरस्वती शिशु मंदिर का। इस स्कूल के पढ़ाई का आंकलन इसी बात से किया जा सकता है कि यहां के बच्चे प्रदेश की टॉपटेन सूची में अपना नाम शुमार किया है। दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में टॉप टेन में स्थान बनाकर बच्चों ने यहां के अच्छी शिक्षण व्यवस्था पर मुहर लगा दी है। स्कूल में बच्चों की सुविधा की बात करें तो यहां बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधा है। शहर एवं आसपास गांवां के बच्चों के लिए वाहन की सुविधा है तो वहीं स्कूल के बच्चे संस्कृत के अलावा हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में तालीम ले रहे हैं। यहां रोज कम्प्यूटर की भी कक्षा लगाई जाती है। स्कूल में रोज इंग्लिश स्पोकन की कक्षा लगती है। बच्चों को खेल खेल में भी शिक्षा ग्रहण कराया जाता है। स्कूल की बालिकाओं के लिए बालिका शिक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। बच्चों के वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए प्रतिदिन टिकरींग प्रयोगशाला रोबोटिक लैब के जरिए शिक्षा मुहैया कराया जाता है।
संगीत शिक्षा भी लेते हैं बच्चे
बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाने के लिए बच्चे प्रतिदिन संगीत की शिक्षा मान्यता प्राप्त संगीत महाविद्यालय से स्कूल में ग्रहण करते हैं। स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रतिदिन योग शिक्षा जिसमे आसन, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार आदि का अभ्यास कराया जाता है। बीपीएड शिक्षक प्रतिदिन बच्चों को शारीरिक शिक्षा एवं खेल का अभ्यास कराते हैं। स्कूल में फेडरेशन आफ इंडिया से मान्यता प्राप्त स्कूल गेम का आनंद भी बच्चे उठाते हैं। स्कूल में गणित एवं वैदिक गणित की भी सुविधा है।
संगीतमयी प्रार्थना से शुरूआत

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सरस्वती शिशु मंदिर चांपा में आधुनिक शिक्षा उत्कृष्ठ शिक्षण वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार मुहैया करा रहा है। स्कूल में बच्चों की शिक्षा ग्रहण प्रारंभ संगीतमयी प्रार्थना के साथ होता है। सरस्वती शिशु मंदिर चांपा के बच्चों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि हर किसी से ये भैया और बहन कहकर बात करते हैं। बड़ों के प्रति सम्मान तो इनके मन में कुट-कुटकर भरा है तो वहीं छोटों को प्यार और दुलार से मालामाल कर देते हैं। आपकों बता दें कि अच्छी शिक्षा व्यवस्था के चलते सरस्वती शिशु मंदिर चांपा को कई पुरस्कार मिल चुका है।

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