Uncategorized

मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सूची पर उठे सवाल: सांसद के गृहग्राम से 41 नाम, चयन प्रक्रिया पर विपक्ष और स्थानीय लोगों ने मांगा जवाब …

img 20260530 wa00525373715038967359324 Console Corptech

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद की सूची को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सूची में शामिल हितग्राहियों के चयन को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बहस तेज हो गई है।

WhatsApp Image 2025 10 13 at 10.02.11 Console CorptechWhatsApp Image 2026 03 12 at 21.38.36 Console Corptech

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सांसद कमलेश जांगड़े की अनुशंसा पर स्वीकृत 293 हितग्राहियों की सूची में अकेले उनके गृहग्राम मसानियाकला के 41 लोगों के नाम शामिल हैं। यह संख्या कुल सूची का लगभग 14 प्रतिशत बताई जा रही है, जबकि लोकसभा क्षेत्र में करीब 18 लाख 97 हजार से अधिक मतदाता हैं और क्षेत्र आठ विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है।

shrinathji Console Corptech

रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ मिलने का आरोप – स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सूची में शामिल कई लोगों का उपनाम “जांगड़े” है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इनमें सांसद के रिश्तेदार, करीबी परिचित और पड़ोसी भी शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि सूची में कुछ ऐसे लोगों को भी सहायता राशि दिलवाई गई, जिन्हें स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से सक्षम माना जाता है।


चयन प्रक्रिया पर छह बड़े सवाल
मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सूची को लेकर क्षेत्र में निम्नलिखित सवाल उठाए जा रहे हैं—
लगभग 19 लाख मतदाताओं वाले लोकसभा क्षेत्र में केवल 293 लोगों का चयन किन मानदंडों के आधार पर किया गया?
आठ विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकांश क्षेत्रों के लोगों को सूची में अपेक्षाकृत कम स्थान क्यों मिला?
मसानियाकला गांव के 41 लोगों का चयन किन आधारों पर हुआ?
क्या लाभार्थियों की पात्रता का स्वतंत्र सत्यापन कराया गया था?
क्या सांसद कार्यालय ने चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती?
यदि चयन निष्पक्ष था तो पूरे क्षेत्र में लाभार्थियों का संतुलित वितरण क्यों दिखाई नहीं देता?


निष्पक्षता की जांच की मांग – राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ही गांव से असामान्य संख्या में नाम शामिल होना महज संयोग नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि लाभार्थियों का चयन किन मापदंडों के आधार पर किया गया। लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी सहायता योजनाओं में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित नहीं किए गए, तो इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

फिलहाल सांसद कार्यालय या संबंधित प्रशासनिक विभाग की ओर से इन आरोपों और सवालों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में क्षेत्र की जनता चयन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे