



जांजगीर-चांपा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चांपा में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। विभागीय दस्तावेजों के आधार पर यह सामने आया है कि वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर पदोन्नति को लेकर नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।


दरअसल, जिले के शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत सहायक ग्रेड-2/लेखापाल (लेखा प्रशिक्षण उत्तीर्ण) कर्मचारियों की एक वरिष्ठता सूची जारी है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस सूची में भुवन लाल सिदार (लेखापाल, बीईओ अकलतरा) का नाम प्रथम क्रमांक पर दर्ज है। सेवा नियमों के अनुसार वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची में शीर्ष स्थान पर दर्ज पात्र कर्मचारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि नियमों के विपरीत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ कनिष्ठ लेखा परीक्षक रामचंद्र कश्यप की पदोन्नति वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर करने की पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्यवाही भी कर ली गई है, जिससे विभाग के भीतर ही कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठता सूची में पहले स्थान पर भुवन लाल सिदार होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर अन्य कर्मचारी को लाभ देने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वरिष्ठता क्रम में कथित रूप से फेरबदल कर रामचंद्र कश्यप का नाम ऊपर लाने की कोशिश की गई, जिससे उन्हें पदोन्नति का लाभ मिल सके। जानकारों का कहना है कि यदि वरिष्ठता सूची को दरकिनार कर पदोन्नति दी जाती है तो यह सीधे-सीधे सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इससे पात्र कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी हो सकता है। इधर, शिक्षा विभाग में पहले से ही पदोन्नति, नियुक्ति और पदस्थापना को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलती रही हैं। ऐसे में यह नया मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बहरहाल, अब यह देखना होगा कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया को पुनः परीक्षण किया जाएगा या नहीं।


पदोन्नति के लिए 40 से 50 हजार की चर्चा – जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर हलचल तेज है। सूत्रों का दावा है कि भृत्य से सहायक ग्रेड-3, सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 तथा कनिष्ठ लेखा परीक्षक से वरिष्ठ लेखा परीक्षक के लगभग 50 पदों पर पदोन्नति की तैयारी चल रही है। आरोप है कि एक-एक पद पर पदोन्नति के लिए 40 से 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारी और संगठन से जुड़े लोग पदोन्नति दिलाने और मनचाही जगह पदस्थापना कराने का दावा कर रहे हैं।








