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पैरा आर्ट से महिला क्लस्टर संगठन की दीदियों को मिला आजीविका …

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जांजगीर-चांपा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) आज जिले में बदलाव की एक सशक्त कहानी लिख रहा है। इस योजना के माध्यम से न केवल महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने हुनर को पहचानने और आय के स्रोत में बढ़ाने में मदद मिल रही है। स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम बरभांठा की श्रीमती ललिता जाटवार की कहानी सामने आती है, जिन्होंने बिहान से जुड़कर पैरा आर्ट के माध्यम से अपनी एक नई पहचान बनाई है। श्रीमती ललिता जाटवार की कहानी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। कभी केवल एक गृहिणी के रूप में जीवन व्यतीत करने वाली ललिता आज अपनी मेहनत और हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। श्रीमती ललिता जाटवार बताती हैं कि पहले उनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं था। घर की जिम्मेदारियों तक ही उनका जीवन सीमित था।

लेकिन जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत भारतीय महिला क्लस्टर संगठन, सेमरा से जुड़ीं, तब उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें “पैरा आर्ट” का प्रशिक्षण मिला। इस कला के माध्यम से वे पैरा (धान के अवशेष) से सुंदर और आकर्षक सजावटी चित्र कलाकृति बनाने लगीं जिसमें महापुरूषों, नदी, पहाड़, झरने साहित विभिन्न कलाकृतियां। उनकी बनाई हुई आकृतियां न केवल देखने में आकर्षक होती हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। धीरे-धीरे ललिता और उनके समूह की अन्य दीदियों ने अपने उत्पादों को आसपास के बाजारों में बेचना शुरू किया। आज वे इस कार्य से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन गई हैं। आज उनके कार्य को देखकर आसपास की महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। इसके लिए श्रीमती ललिता जाटवार शासन का आभार व्यक्त करती हैं।

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