

चांपा। श्रीमद् भगवत गीता सार – सुखद जीवन का आधार कार्यक्रम में आध्यात्मिक विचारों की गूंज के साथ श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में गीता सार प्रवक्ता ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने कहा कि आत्मा मूल रूप से सतोगुणी है, जिसमें सुख, शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता समाहित है। यही आत्मा पंचतत्वों से बने इस विशाल शरीर को संचालित करती है और इन्हीं गुणों के आधार पर सत्कर्म कर पुण्यात्मा बनती है।


शशिप्रभा दीदी ने कहा कि वर्तमान कलयुगी वातावरण के प्रभाव में आत्मा अपने मूल सतगुणों को भूलती जा रही है, जिसके कारण विकर्म और पापकर्म बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में श्रीमद् भगवत गीता का ज्ञान ही आत्मा की सोई हुई शक्तियों को जागृत करने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने कर्म, अकर्म और विकर्म की गूढ़ व्याख्या करते हुए जीवन में सही कर्म पथ अपनाने का संदेश दिया।


कार्यक्रम के आयोजक लक्ष्मीचंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन ने मुख्य अतिथि का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। गीता ज्ञान से ओतप्रोत इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।








