डॉक्टर बोले– कैंसर है सट्टा, वकील ने कहा कानून सो रहा, महिला बोली घर उजड़ रहे, नेता ने उठाए पुलिस पर सवाल …




चांपा। क्रिकेट सट्टे का जाल अब चांपा क्षेत्रों में युवाओं की ज़िंदगी निगलने लगा है। ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी इस कदर बेलगाम हो चुकी है कि कई घरों की खुशियां उजड़ चुकी हैं और युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। चमक-दमक और रातों-रात अमीर बनने के झूठे सपने दिखाकर सट्टा गिरोह युवाओं को अपने दलदल में धकेल रहे हैं।


सट्टे की शुरुआत कुछ सौ या हजार रुपये से होती है, लेकिन हार का सिलसिला शुरू होते ही युवा भारी ब्याज पर पैसे उठाने को मजबूर हो जाते हैं। निजी साहूकारों और सट्टा संचालकों से लिया गया कर्ज जब चुकाना मुश्किल होता है, तो मानसिक तनाव, डर और बदनामी युवाओं की जिंदगी को नरक बना देती है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि कई युवा अवसाद में जा रहे हैं, तो कुछ आर्थिक और मानसिक दबाव में आत्मघाती कदम तक उठा रहे हैं। कई ऐसे मामले हैं जो सामाजिक बदनामी के डर से सामने ही नहीं आ पाते।


“सट्टा समाज के लिए कैंसर” – डॉक्टर
डॉक्टर शुभम गुप्ता का कहना है कि सट्टा युवाओं के लिए शरीर में फैलने वाले कैंसर की तरह है, जो धीरे-धीरे इंसान को खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि सट्टा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरे समाज को खोखला कर देता है। घर, स्कूल और समाज को मिलकर ऐसी दिशा देनी होगी कि युवा इस दलदल में जाए ही नहीं। सबसे अच्छी कार्रवाई वही है, जिसकी नौबत ही न आए।
“मां-बाप और पुलिस दोनों की जिम्मेदारी” – वकील
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपीचंद बरेठ के अनुसार सट्टा युवाओं को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। माता-पिता को अपने बच्चों पर विशेष नजर रखनी चाहिए और समाज में व्यापक जनजागरूकता जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस को ऐसे मामलों में पूरी तरह सजग रहना होगा और किसी भी तरह की संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

“पुलिस ही पहली और आखिरी कड़ी” – समाजसेवी/महिला
महिला एवं समाजसेवी मंजूषा पाटले ने कहा कि परिवार का अनुशासन, बच्चों की गतिविधियों की जानकारी और समय पर हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। अगर पुलिस ही ऐसे मामलों में संलिप्त होगी, तो आम जनता किस पर भरोसा करेगी? उन्होंने सट्टे के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की मांग की।
“पुलिस चाहे तो 10 मिनट में सट्टा बंद” – कांग्रेस
जिला कांग्रेस प्रवक्ता नागेंद्र गुप्ता ने पुलिस की निष्क्रियता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर पुलिस चाहे तो 10 मिनट में सट्टा बंद हो सकता है। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का लालच युवाओं को तबाह कर रहा है। सट्टा जैसे जहर को रोकने के लिए कठोर कार्रवाई और कानून का डर जरूरी है।

चांपा में उबाल, पुलिस से सीधे सवाल – चांपा नगर में सट्टा इस कदर फैल चुका है कि अब हर वर्ग के लोग पुलिस प्रशासन से सवाल कर रहे हैं—आखिर इस पर कब पूरी तरह अंकुश लगेगा? क्या पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी या फिर “सेटिंग” के सहारे यह अवैध कारोबार यूं ही चलता रहेगा?




