


चांपा। भारतीय जनता पार्टी का प्रचलित नारा “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे” चांपा में अब पूरी तरह उलटा असर दिखता नजर आ रहा है। यहां सियासी गलियारों और गली-मोहल्लों में इन दिनों एक नई कहावत जोर पकड़ रही है —
“हमने बनाया है, अब हम ही हटाएंगे।”

यह चर्चा सरस्वती शिशु मंदिर में हाल ही में हुई भाजपा की आंतरिक बैठक के बाद तेज हो गई है। बैठक के बाद से ही नगर में तरह-तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं और भाजपा संगठन की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

सूत्रों के अनुसार, चांपा भाजपा मंडल अध्यक्ष संतोष थवाईत (चाबु) को हटाने के लिए मंडल के सभी पदाधिकारी एकजुट हो गए हैं। बैठक में एक स्वर में यह बात रखी गई कि अब वर्तमान मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में काम करना संभव नहीं है।
बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने वरिष्ठ भाजपा नेताओं के सामने साफ शब्दों में कहा कि“या तो मंडल अध्यक्ष को बदला जाए, या फिर हम सभी उनके नेतृत्व में काम नहीं करेंगे।” यह विरोध केवल मौखिक नहीं रहा, बल्कि रजिस्टर में लिखित आपत्ति दर्ज कर सभी पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर भी किए, और यह प्रस्ताव जिलाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया।
सूत्र बताते हैं कि यह पूरा घटनाक्रम मंडल अध्यक्ष की मौजूदगी में हुआ, जिससे बैठक का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। पदाधिकारियों का आरोप है कि मंडल अध्यक्ष न तो संगठन को विश्वास में लेते हैं, न ही किसी निर्णय की जानकारी साझा करते हैं। कई महीनों से संगठन के भीतर नाराजगी पनप रही थी, जो अब खुले विरोध में बदल चुकी है।
चांपा भाजपा में यह चर्चा भी आम है कि पिछले कई महीनों से पदाधिकारी अपने ही अध्यक्ष से असंतुष्ट थे, लेकिन अब पहली बार यह नाराजगी सार्वजनिक सामने आई है। बैठक के बाद से नगर में हर चौक-चौराहे और गली-मोहल्ले में इसी मुद्दे पर चर्चा हो रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या एक मंडल अध्यक्ष पूरे संगठन पर भारी पड़ेगा, या पार्टी नेतृत्व पदाधिकारियों की आवाज सुनकर कार्रवाई करेगा?
फिलहाल चांपा भाजपा संगठन अंदरूनी कलह और नेतृत्व संकट के दौर से गुजर रहा है। आने वाले दिनों में जिला और प्रदेश नेतृत्व का फैसला तय करेगा कि यह विवाद थमता है या और गहराता है।





