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मनुष्य जीवन दुर्लभ अवसर, आत्मिक आनंद की खोज जरूरी ~ रासेश्वरी देवी …

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जांजगीर-चांपा। हाई स्कूल ग्राउंड जांजगीर में आयोजित परम पावन ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ दार्शनिक प्रवचन श्रृंखला के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को ज्ञान, भक्ति और अध्यात्म का संदेश मिला। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका पूजनीया रासेश्वरी देवी जी ने मनुष्य जीवन की वास्तविक महिमा और आध्यात्मिक रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान ने बाहरी जीवन को सुविधाजनक बनाने और भौतिक सुख प्राप्त करने में बड़ी प्रगति की है, लेकिन तनाव, चिंता और भय जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। इसके विपरीत उपनिषदों के ऋषियों ने बाहरी संसार के बजाय आत्मा और मन पर शोध किया तथा ब्रह्मविद्या के माध्यम से शाश्वत आनंद का मार्ग बताया। उन्होंने विष्णु पुराण के श्लोक का उल्लेख करते हुए मनुष्य जन्म को अत्यंत दुर्लभ बताया। उनके अनुसार मनुष्य को विवेक और कर्म की स्वतंत्रता प्राप्त है, जिसका उपयोग भक्ति, साधना और आत्मज्ञान के लिए किया जा सकता है। रासेश्वरी देवी ने कहा कि मनुष्य जीवन को केवल भौतिक सुखों की दौड़ में व्यर्थ न गंवाकर आत्मिक शांति और परम आनंद की खोज को भी जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।

8 अक्टूबर तक चलेगी प्रवचन श्रृंखला ~ आयोजकों के अनुसार ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन श्रृंखला प्रतिदिन शाम 6:30 से रात 8:30 बजे तक हाई स्कूल ग्राउंड में आयोजित होगी। कार्यक्रम में प्रवेश निःशुल्क है।

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