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स्कूल खुले पर किताबें नदारद : माह बीतने के बाद भी नहीं मिली पुस्तकें, बच्चों की पढ़ाई पर संकट …

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जांजगीर-चांपाजिले के आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा सत्र की शुरुआत को एक महीना बीत चुका है, लेकिन बच्चों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नसीब नहीं हुई हैं। 16 जून से स्कूलों के द्वार तो खुल गए, परंतु किताबों की अनुपलब्धता ने पढ़ाई की गति को जाम कर दिया है। खासकर प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्रों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं।

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न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों, यहां तक कि पीएम स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में भी नई शिक्षा नीति और बारकोडिंग के चलते अंग्रेजी पुस्तकें अभी तक नहीं पहुंच पाईं हैं। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों में भी भारी असंतोष देखने को मिल रहा है।

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अभिभावकों की चिंता – अभिभावकों ने कहा कि वे बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेज रहे हैं, लेकिन किताबें नहीं होने से वे पढ़ाई नहीं समझ पा रहे। होमवर्क करना भी मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर शिक्षक अपनी पुरानी पुस्तकों और सीमित संसाधनों से पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है।

कई विद्यालय प्राचार्यों ने बताया कि वे पुस्तक वितरण केंद्रों से लगातार संपर्क कर रहे हैं, लेकिन केवल ‘आश्वासन’ ही मिल रहा है। किताबें कब आएंगी, इसका कोई ठोस जवाब नहीं है। बच्चों को किताबें मिलते ही तत्काल वितरण की बात कही जा रही है।

प्रशासन कब देगा ध्यान? – बड़ी बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर पुस्तक वितरण में देरी के बावजूद अब तक शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न कोई जवाबदेही तय की गई है और न ही वैकल्पिक समाधान की पहल।

क्या कहते हैं शिक्षा विभाग के अधिकारी?
इस संबंध में बम्नीह डीह  ब्लाक शिक्षा अधिकारी रत्ना थवाईत  का कहना है कि हमनें उच्च अधिकारियों समेत शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दे दी है,मांग पत्र भी भेजा जा चुका है।जैसे ही डिपो में पुस्तकें आएगी उन्हें वितरण कराया जाएगा…

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