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परमात्मा सूर्य चांद तारों से पार परमधाम के निवासी हैं परम पवित्र है,भारत बनेगा पुनः सोने की चिड़िया और विश्वगुरु – शशिप्रभा दीदी…

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चांपा। लक्ष्मी टाइपिंग हजारी गली अम्बे रेसिडेंसी चांपा में चल रहे श्रीमद् भगवत गीता सार सुखद् जीवन का आधार कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने कहा, परमात्मा सूर्य चांद तारों से पार परमधाम के निवासी हैं परम पवित्र है।परमात्मा इस धरा पर आकर पुनः सृष्टि पर परिवर्तन का कार्य कराते हैं सृष्टि नूतन समय अपने आदिकाल में सतयुग स्वर्ण काल था गीता के 15 वें अध्याय में कहा गया है कि सृष्टि उल्टे कल्पवृक्ष के समान है जिसका मूल अर्थात जड़ ऊपर है और वेद रूपी शाखाएं और पत्ते नीचे हैं अर्थात मनुष्य सृष्टि रूपी आत्माओं का झाड़ है जिसका बीज स्वयं परमात्मा है।

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इस सृष्टि पर आदि में श्री राधे और श्री कृष्ण जो की स्वयंवर के पश्चात श्रीलक्ष्मी और नारायण कहलाते हैं राज्य चलता है,वहाँ स्वर्ण काल में घी, दूध की नदियां बहती थी।अर्थात संपन्न संपूर्ण सुख शांतिमय दुनिया थी। सृष्टि परिवर्तन का यह संधिकाल हैं जिसे परमात्मा ने लिप युग पुरुषोत्तम संगम युग नाम दिया है इस वेला में हर मानव आत्मा जो अर्जुन का प्रतीक है स्वयं में परिवर्तन करते हुए श्रेष्ठ संस्कारों को धारण कर सतयुगी दिव्य संस्कारों को विद्यमान कर भारत को विश्वगुरु का स्थान दिला सकते हैं और आने वाला नूतन स्वर्ण काल सोने की चिड़िया कहलाएगा। सृष्टि को सतयुग से कलयुग बनाने में मनुष्य आत्माओं की भूमिका है अतः हमें ही कलयुग से सतयुग बनाने की भूमिका निभानी पड़ेगी। सतयुग से कलयुग कैसे बन गई दुनिया आहार,व्यवहार, संस्कार, विचार बदला। अब हमें अपने आहार व्यवहार, विचार और संस्कारों को दिव्य बनाना है तो यह दुनिया फिर से सतयुग बन जायेगा और भारत बनेगा पुनः सोने की चिड़िया और विश्वगुरु उक्त बातें कथावाचीका ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी नें चांपा में आयोजित श्रीमद् भगवत गीता सार सुखद जीवन का आधार ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन कहीं। कार्यक्रम के आयोजक  लक्ष्मीचंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन नें जो की स्व. जगन्नाथ देवांगन एवं माता सहोदर बाई के वार्षिक श्राद पर उनकी स्मृति में पुण्य फलदायक पावन पुनीत कार्यक्रम का आयोजन किया है।

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