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वरिष्ठता को दरकिनार करने के आरोप के बाद शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप …

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जांजगीर-चांपा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चांपा में पदोन्नति को लेकर सामने आए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। वरिष्ठता सूची को नजरअंदाज कर पदोन्नति देने के आरोपों के बीच अब प्रशासन भी सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में कलेक्टर जन्मेजय महोबे द्वारा संज्ञान लिए जाने की जानकारी मिल रही है, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हलचल और तेज हो गई है।

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जानकारी के अनुसार जिले में भृत्य से सहायक ग्रेड-3, सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 तथा कनिष्ठ लेखा परीक्षक से वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर लगभग 50 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारी की जा रही है और जल्द ही पदोन्नति सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद को लेकर विवाद सामने आया है।विभागीय दस्तावेजों के अनुसार सहायक ग्रेड-2/लेखापाल (लेखा प्रशिक्षण उत्तीर्ण) कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची में भुवन लाल सिदार का नाम प्रथम स्थान पर बताया जा रहा है। सेवा नियमों के अनुसार वरिष्ठता सूची में शीर्ष स्थान पर दर्ज पात्र कर्मचारी को पदोन्नति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।लेकिन सूत्रों का दावा है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ कनिष्ठ लेखा परीक्षक रामचंद्र कश्यप की पदोन्नति वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्यवाही भी पूरी कर ली गई है। इस कारण विभाग के भीतर ही कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि वरिष्ठता सूची में पहले स्थान पर दर्ज कर्मचारी को नजरअंदाज कर किसी अन्य कर्मचारी को पदोन्नति दी जाती है तो यह सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भी संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों से उनके द्वारा जानकारी ली जा सकती है। बहरहाल, यदि मामले की बारीकी से जांच होती है तो पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

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पदोन्नति के लिए 40–50 हजार की चर्चा – सूत्रों का दावा है कि जिले में होने वाली पदोन्नतियों के लिए एक-एक पद पर 40 हजार से 50 हजार रुपए तक की अवैध वसूली की चर्चा है। कुछ लोग पदोन्नति दिलाने और मनचाही जगह पदस्थापना कराने का भरोसा देकर पैसे की मांग कर रहे हैं।

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