



जांजगीर-चांपा। जिला पंचायत जांजगीर-चांपा की सामान्य सभा की बैठक इस बार विकास कार्यों से अधिक अंदरूनी टकराव और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर सुर्खियों में रही। बैठक के दौरान कई महिला जनप्रतिनिधियों ने अपनी बात रखने से रोके जाने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिससे कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।


सूत्रों के अनुसार, बैठक में जब भारतीय जनता पार्टी समर्थित कुछ महिला सदस्य एजेंडे के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करना चाह रही थीं, तभी उन्हें बीच में ही टोक दिया गया। इससे नाराज महिला सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि स्थायी समितियों की सभापति होने के बावजूद उन्हें न तो पूरा समय दिया जा रहा है और न ही उनके प्रस्तावों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस धीरे-धीरे इतनी तीखी हो गई कि बैठक में तू-तू मैं-मैं की स्थिति बन गई। कुछ देर के लिए हालात बेकाबू होते नजर आए और हाथापाई की आशंका तक पैदा हो गई, हालांकि अधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों के हस्तक्षेप से स्थिति को संभाल लिया गया। महिला सदस्यों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। बैठक में उनके सवालों को दबा दिया जाता है और उनके द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि इस रवैये का सीधा असर उनके क्षेत्रों में विकास कार्यों पर पड़ रहा है और वे जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रही हैं। बैठक के दौरान एक ओर जहां महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर रोड़ा बनने के आरोप लगाते हुए निंदा प्रस्ताव की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर महिला जनप्रतिनिधियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने सत्ताधारी दल के भीतर ही समन्वय और संवाद की कमी को उजागर कर दिया। अंदरखाने यह चर्चा भी है कि बैठक के एकतरफा संचालन और संवादहीनता को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई सदस्यों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाली बैठकों में विवाद और गहराने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।



बहरहाल, जिला पंचायत की यह बैठक अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न रहकर लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और आपसी समन्वय पर उठे गंभीर सवालों के कारण चर्चा का विषय बन गई है। खासकर महिला सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोप यह संकेत दे रहे हैं कि स्थानीय राजनीति में भीतर ही भीतर असंतोष पनप रहा है, जो आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।







