



चांपा। सट्टा कारोबार अपने चरम पर पहुंच चुका है। आईपीएल के बहाने खुलेआम चल रहा यह अवैध धंधा अब पूरी एक पीढ़ी को बर्बादी की कगार पर धकेल रहा है। युवा लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई सट्टे में झोंक रहे हैं, जबकि पुलिस की कथित सेटिंग के चलते सट्टेबाज बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
लगातार खबरों के प्रकाशन और ऊपर से बढ़ते दबाव के बाद अब साइबर सेल और चांपा थाना प्रभारी की तिलमिलाहट साफ नजर आने लगी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों ही प्रभारी अपने-अपने स्टाफ पर दबाव बना रहे हैं।
“कुछ भी हो, सट्टे पर कार्रवाई दिखनी चाहिए-कैसे भी करके एक मामला पकड़ो।”


सेटिंग से खुली छूट, बदनामी से बचने को ‘एक-दो केस’ की कवायद!
नगर में इस अचानक सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ सट्टेबाजों से मोटी रकम लेकर उन्हें खुलेआम सट्टा चलाने की छूट दी गई, और दूसरी तरफ जब मीडिया ने सवाल उठाए तो पुलिस विभाग की बदनामी सामने आने लगी। अब उसी बदनामी से बचने के लिए “एक-दो छोटे मामले बनाकर मामला शांत करने” की कोशिश की जा रही है।



सटोरियों को पहले अलर्ट, फिर दिखावटी कार्रवाई! – सूत्र यह भी बताते हैं कि जैसे ही उच्च अधिकारियों या मीडिया का दबाव बढ़ता है, वैसे ही “शुभचिंतकों” के माध्यम से सटोरियों को पहले ही आगाह कर दिया जाता है। नतीजा यह कि कई सटोरियों ने अपनी जगह बदल ली है, तो कुछ ने दो-चार दिन के लिए धंधा बंद कर दिया है। इसके बाद हालात सामान्य दिखाने के लिए किसी छोटे सट्टेबाज पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की जाती है।
पुलिस से उठता भरोसा, जनता करने लगी सवाल – इन घटनाक्रमों के बीच नगर में पुलिस के प्रति जनता का भरोसा लगातार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। आम लोग अब खुलकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि अब पुलिस का असली चेहरा सामने आने लगा है और जनता भी हर गतिविधि पर नजर रखने लगी है।
फिलहाल, सट्टा नेटवर्क भले ही कुछ दिनों के लिए भूमिगत हुआ हो, लेकिन सवाल यह है? क्या यह कार्रवाई वास्तविक होगी या फिर हमेशा की तरह दिखावे की भेंट चढ़ जाएगी?







