


जांजगीर-चांपा/सक्ती। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से जारी सहायता राशि की सूची की गहन पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को महज प्रशासनिक अनियमितता नहीं बल्कि राजनीतिक संरक्षण और प्रभाव के जरिए सरकारी सहायता वितरण के गंभीर आरोपों के दायरे में ला खड़ा किया है। लगातार सामने आ रहे नए तथ्यों ने जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कमलेश जांगड़े की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


कर्मचारी और उसके परिवार को भी मिली सहायता राशि। सूची की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जितेंद्र यादव, पिता परसराम यादव, निवासी बाजार पारा वार्ड क्रमांक-6, सक्ती जो सांसद कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं उन्हें मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराई गई। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जितेंद्र यादव की माता बृजबाई यादव (पति परसराम यादव), निवासी बाजार पारा वार्ड क्रमांक-6, सक्ती को भी इसी मद से 10 हजार रुपये की सहायता दी गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सांसद कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी को नियमित वेतन मिल रहा है, तो उसे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से सहायता दिलाने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी?
क्या संबंधित कर्मचारी को आर्थिक रूप से अक्षम घोषित किया गया था? यदि हां, तो उसका आधार क्या था? और यदि नहीं, तो फिर उसका नाम किस पात्रता मानदंड के तहत सूची में शामिल किया गया? सूत्रों के मुताबिक, सूची में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के नाम भी सामने आए हैं, जिससे यह आशंका और गहराती जा रही है कि स्वेच्छानुदान का वितरण जरूरतमंदों की बजाय पहचान और पहुंच के आधार पर किया गया। स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी संवेदनशील सहायता योजना का उद्देश्य अत्यंत जरूरतमंदों को राहत पहुंचाना है। यदि इसमें कार्यालयीन कर्मचारियों, परिचितों या राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया, तो यह योजना की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर सांसद कार्यालय या संबंधित प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बढ़ते सवालों के बीच अब स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद का उपयोग वास्तव में जरूरतमंदों के लिए हुआ या फिर प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के लिए है।





