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सहायक परियोजना अधिकारी प्रीति पवार का रायगढ़ तबादला, 50 दिन बाद लागू हुआ स्थानांतरण आदेश …

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जांजगीर-चांपा/जैजैपुर। खबरों और गंभीर आरोपों के खुलासे के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है। शासन के स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी सहायक परियोजना अधिकारी प्रीति पवार को अब रायगढ़ जिला स्थानांतरित कर दिया गया है। लंबे समय से पद पर जमी अधिकारी को लेकर खबरें सामने आने के बाद शासन स्तर पर यह कार्रवाई की गई।

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जानकारी के अनुसार प्रीति पवार का 29 सितंबर 2025 को जिला पंचायत जांजगीर के लिए स्थानांतरण आदेश जारी हुआ था, लेकिन करीब 50 दिनों तक न तो उन्हें रिलीव किया गया और न ही उन्होंने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण किया। स्थानांतरण के बावजूद पद पर बने रहना शासनादेश की खुली अवहेलना माना गया, जिसे लेकर मीडिया में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित हुए।खबरों में यह भी सवाल उठाया गया कि आखिर किसके संरक्षण में अधिकारी इतने समय तक “मलाईदार पद” पर बनी रहीं और क्यों जिला प्रशासन शासन के आदेशों को लागू कराने में विफल रहा।

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भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शिकायतकर्ताओं के अनुसार सहायक परियोजना अधिकारी रहते हुए प्रीति पवार पर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, रीपा स्वावलंबन योजना सहित अन्य विकास योजनाओं में बिना कमीशन फाइलें लंबित रखने के आरोप लगे। विभिन्न शासकीय टेंडरों में कथित तौर पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने के बाद ही अनुमति देने की शिकायतें भी सामने आईं।

आरोप यह भी हैं कि प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सक्ती के पद पर रहते हुए उन्होंने जिला पंचायत जेठा के ‘स्वाद महल’ में स्व-सहायता समूह से कथित रूप से घूस लेकर अपने चहेते व्यक्ति को टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रति आवास ₹10,000 की अवैध वसूली और भारी अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।

आवास मित्रों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप आवास मित्रों ने शिकायतों में बताया कि उनसे लगातार अवैध वसूली की जाती थी। राशि न पहुंचने पर छोटी-छोटी तकनीकी त्रुटियां निकालकर उनके खिलाफ शिकायतें करवाई जाती थीं, जिससे उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता था।

मीडिया के बाद टूटी चुप्पी स्थानांतरण आदेश के बावजूद अधिकारी का लंबे समय तक पद पर बने रहना उच्च अधिकारियों की चुप्पी और कथित संरक्षण की ओर इशारा करता रहा। पत्रिका में मामला उजागर होने और जनप्रतिनिधियों व आम जनता में नाराजगी बढ़ने के बाद आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए प्रीति पवार का रायगढ़ स्थानांतरण कर दिया।

हालांकि तबादला हो चुका है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या कार्रवाई केवल स्थानांतरण तक ही सीमित रह जाएगी। इस पर अब जनता और जनप्रतिनिधियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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