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पेपर लीक की सजा छात्रों को क्यों? माशिमं और सरकार पर उठे सवाल,छात्रों के साथ अन्याय – नागेंद्र गुप्ता …

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चांपा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा 12वीं बोर्ड की हिंदी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा लेने के निर्णय पर सियासत तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नागेंद्र गुप्ता ने इस फैसले को लाखों विद्यार्थियों के साथ अन्याय करार देते हुए भाजपा सरकार और माशिमं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नागेंद्र गुप्ता ने कहा कि 14 मार्च को होने वाली हिंदी विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र 13 मार्च को ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बावजूद शुरुआत में माशिमं के अधिकारी और सरकार के जिम्मेदार मंत्री लगातार पर्चा लीक होने से इनकार करते रहे। जब मामला तूल पकड़ने लगा और विपक्ष व छात्र संगठनों ने आवाज उठाई, तब इसे विधानसभा में भी उठाया गया। शिक्षा मंत्री द्वारा भी पहले प्रश्नपत्र लीक होने से इनकार किया गया, लेकिन बाद में परीक्षा समिति को पर्चा लीक मानते हुए परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार और मंडल की लापरवाही की सजा छात्र-छात्राएं क्यों भुगतें। लगभग 2.5 लाख परीक्षार्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ेगा और उनका समय व भविष्य दोनों प्रभावित होंगे। जिन विद्यार्थियों ने ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा दी, उन्हें फिर से उसी तनाव से गुजरना पड़ेगा
नागेंद्र गुप्ता ने चिंता जताई कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही मंडल द्वारा कोई ठोस विभागीय जांच शुरू की गई है। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल पर्चा लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। यदि समय रहते दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी, जिससे छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
नागेंद्र गुप्ता ने मांग की कि पर्चा लीक मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए, छात्रों को पुनः परीक्षा से राहत देने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाए और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी व सुरक्षित बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ इस तरह का अन्याय किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार यदि परीक्षा की गोपनीयता नहीं रख सकती, तो राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर कैसे भरोसा किया जा सकता है।

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