जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर में अब पदोन्नति का खेल! ,50 पदों पर पदोन्नति को लेकर अवैध वसूली के लग रहे गंभीर आरोप …






जांजगीर-चांपा। जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जिले में संचालित शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बताया जा रहा है कि भृत्य से सहायक ग्रेड-3, सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 तथा कनिष्ठ लेखा परीक्षक से वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद पर लगभग 50 पदों पर पदोन्नति की तैयारी की जा रही है।


जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर में इस संबंध में युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही है और विभागीय स्तर पर पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर पदोन्नति सूची जारी की जा सकती है। लेकिन इसी बीच पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि एक-एक पद पर पदोन्नति के लिए 40 हजार से 50 हजार रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों से जुड़े कुछ लोग भी इस पूरे खेल में सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि पदोन्नति के लिए पात्र कर्मचारियों से यह कहा जा रहा है कि यदि वे 40 से 50 हजार रुपए तक खर्च करें तो उन्हें पदोन्नति दिलाने के साथ मनचाही जगह पर पदस्थापना भी कराई जा सकती है। इस तरह की चर्चाओं के बाद विभाग के भीतर असंतोष और बेचैनी बढ़ने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह शिक्षा विभाग में पदोन्नति के नाम पर बड़ा खेल साबित हो सकता है। वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


🔴 फर्जी शिक्षाकर्मियों से मासिक वसूली की चर्चा – जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर पहले भी विवादों में रहा है। कुछ समय पहले फर्जी शिक्षाकर्मियों से मासिक खर्चा वसूली की चर्चा सामने आई थी। बताया गया था कि कई अपात्र लोग वर्षों से सेवा में बने हुए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से उनसे नियमित वसूली की जा रही है। हालांकि, इस मामले में ठोस कार्रवाई अब तक सामने नहीं आई।
🔴अपात्रों को अनुकंपा नियुक्ति देने का आरोप – शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर भी कई सवाल उठ चुके हैं। आरोप लगाए गए कि पात्रता की अनदेखी कर कुछ लोगों को नियमों के विपरीत नियुक्ति दे दी गई। इस मामले में भी कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।
🔴 मनचाही पदस्थापना का पुराना खेल – जिले में लंबे समय से यह चर्चा भी चलती रही है कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी मनचाही जगह पर पदस्थापना के लिए जुगाड़ लगाते हैं। आरोप है कि इसके लिए भी कार्यालय के भीतर अनौपचारिक तरीके से लेन-देन की व्यवस्था चलती है। हालांकि, विभागीय स्तर पर कभी भी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया।
🔴 अपात्रों को पदोन्नति देने के आरोप – शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया भी कई बार विवादों में रही है। पूर्व में भी ऐसे आरोप लगे थे कि वरिष्ठता और पात्रता की अनदेखी कर कुछ कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। इससे कई पात्र कर्मचारी वंचित रह गए थे और उन्होंने नाराजगी भी जताई थी।
🔴प्रश्न पत्र छपाई पर भी उठ चुके हैं सवाल -हाल ही में जिले के स्कूलों के लिए कक्षा पहली से 11वीं तक के प्रश्न पत्रों की छपाई को लेकर भी विवाद सामने आया था। चर्चा रही कि स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस को दरकिनार कर दूसरे राज्य के किसी प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्न पत्र छपवाए गए। साथ ही निविदा प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठे थे।
अब सबकी निगाहें पदोन्नति सूची पर – फिलहाल, शिक्षा विभाग में होने वाली पदोन्नति सूची को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल है। यदि वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।वहीं यह भी देखना होगा कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और पदोन्नति प्रक्रिया को किस तरह पारदर्शी बनाते हैं।






