



जांजगीर चांपा। 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम के संसद में गिरने पर इस महत्वपूर्ण विषय पर जिला कांग्रेस कमेटी का जांजगीर चांपा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी झूठ बोल रही है, महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 106 वां संविधान संशोधन 2023 में संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है जो कि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी के हस्ताक्षर पश्चात कानून भी बन चुकी है।


कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी। सीटों के परिसीमन पर भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है। कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है, जिसके फलस्वरूप पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा है, सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं।


सरकार ने 131 वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया
- भाजपा सरकार का परिसीमन बिल पर देश के अन्य राज्यों को आपत्ति थी, भाजपा आरक्षण सामने रख कर परिसीमन बिल पास करना चाहती है।
भाजपा 2011 के जनगणना को आधार मान कर परिसीमन करना चाहती है। - जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है तो जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा ?
- महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किये बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती सरकार ? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है।
- सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया?
- जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2036 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता।
- भाजपा की मंशा महिला आरक्षण देना नहीं बल्कि मन मुताबिक निर्वाचन क्षेत्र बनाकर, अपने लिए स्थाई सत्ता सुनिश्चित करना है।
भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है
- संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें ।
- परिसीमन विधेयक – जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की जा रही थी।
- विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके।
यह विधेयक इसलिए गिरा – भाजपा सरकार का परिसीमन बिल पर देश के अन्य राज्यों को आपत्ति थी भाजपा आरक्षण सामने रख कर परिसीमन बिल पास करना चाहती है।
- भाजपा 2011 के जनगणना को आधार मान कर परिसीमन करना चाहती है। जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है। जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा? महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किये बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती सरकार ? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है।
- सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया? जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2036 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता।








