



जांजगीर-चांपा। जिले के सीमा क्षेत्र में जुआ अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुले संरक्षण में फल-फूल रहा है। तीन जिलों के बॉर्डर पर दो-दो दिन तक बेखौफ जुआ खिलवाया जा रहा है और इस अवैध कारोबार में साइबर सेल के कुछ आरक्षक व एक प्रधान आरक्षक की भूमिका गंभीर रूप से संदिग्ध बताई जा रही है। जुआरियों को न केवल संरक्षण मिल रहा है, बल्कि पुलिस की जानकारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, चांपा से लगे अमोदर गांव में जुआरियों की नियमित महफिल सजती है, वहीं सक्ती जिले के कड़ारी क्षेत्र में खुलेआम दांव लगाए जाते हैं। दूसरी ओर कोरबा जिले के पहाड़ी गांव जुआरियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं।


ऑडियो ने खोली पोल, “रात में खुलकर गेम चलाओ”
एक वायरल ऑडियो में साइबर सेल के एक आरक्षक द्वारा जुआरी को मोबाइल पर ही खुली छूट देते हुए सुना जा सकता है। उक्त आरक्षक, जो पूर्व में अकलतरा में पदस्थ रहा है, जुआ फड़ संचालन करने वाले को कहता है— “आप रात में खुलकर गेम चलाओ, इधर मैं देख लूंगा।” इस कथित संरक्षण के बाद जुआरी बेखौफ होकर रातभर जुआ खिलवा रहे हैं।



घेराबंदी से पहले अलर्ट, जुआरी बदल लेते हैं लोकेशन
इस जुआ फड़ में रोजाना लाखों रुपये का दांव लग रहा है। जुआरी इसलिए निडर हैं क्योंकि पुलिस से उनकी कथित सेटिंग बताई जा रही है। जब भी किसी कार्रवाई की भनक लगती है, तो अंदरूनी सूचना के जरिए जुआरियों को पहले ही अलर्ट कर दिया जाता है, जिससे वे समय रहते ठिकाना बदल लेते हैं।
आईपीएल सट्टे का गढ़ बना चांपा, कार्रवाई शून्य
चांपा शहर को आईपीएल सट्टे का गढ़ माना जाता है। आईपीएल पूरे शबाब पर है, रोजाना लाखों-करोड़ों का सट्टा लग रहा है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि चांपा पुलिस ने अब तक एक भी सट्टा प्रकरण दर्ज नहीं किया है। सट्टे पर कार्रवाई पूरी तरह शून्य है। युवा पीढ़ी तेजी से इस दलदल में फंस रही है और आर्थिक तबाही झेल रही है।
एसपी के ट्रेनिंग पर जाते ही सटोरियों की मौज
बताया जा रहा है कि पूर्व एसपी विजय पांडे के हैदराबाद ट्रेनिंग पर जाने के बाद से जिले में सट्टा-जुआ कारोबार को खुली हवा मिल गई है। पुलिस और सटोरियों की कथित सेटिंग से यह अवैध धंधा बेखौफ चल रहा है। वहीं नए प्रभारी एसपी की ओर से भी सख्त कार्रवाई के संकेत न मिलने से सवाल और गहरे हो गए हैं।
सवालों के घेरे में पुलिस, कब टूटेगा अवैध गठजोड़?
तीन जिलों की सीमा पर चल रहे इस जुआ-सट्टा सिंडिकेट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध कारोबार युवाओं के भविष्य को निगलता रहेगा।







