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ओपीडी में मेडिसिन विशेषज्ञ नदारद, डॉ. लोकेंद्र कश्यप को हटाने के बाद और बिगड़े हालात …

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जांजगीर-चांपा। जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी अब मरीजों पर सीधे असर डाल रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी क्रमांक 20, जहां मेडिसिन विशेषज्ञ की सेवाएं दी जाती थीं, वहां फिलहाल कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। इसके चलते प्रतिदिन इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीजों को बिना उपचार के ही लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति डॉ. लोकेंद्र कश्यप की संविदा सेवा समाप्त किए जाने के बाद और अधिक गंभीर हो गई है।

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दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज घंटों लाइन में लगने के बाद जब यह जान पाते हैं कि मेडिसिन विशेषज्ञ मौजूद नहीं हैं, तो उन्हें भारी निराशा का सामना करना पड़ता है। भीषण गर्मी के बीच बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए यह स्थिति अत्यंत कष्टदायक बन गई है। कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह से अस्पताल परिसर में बैठे रहे, लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ा। गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा जिले में पहले से ही एमडी मेडिसिन डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। जिला अस्पताल, सीएचसी, बीडीएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज मिलाकर जिले में कुल 12 मेडिसिन विशेषज्ञों की आवश्यकता है, लेकिन वास्तविकता में स्थिति बेहद चिंताजनक है। हाल ही में जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र कश्यप की संविदा सेवा एकतरफा नोटिस के जरिए समाप्त कर दी गई, जिसके बाद मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है।

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डॉ. लोकेंद्र कश्यप की सेवा समाप्ति को लेकर छत्तीसगढ़ इनसर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (सीडा) पहले ही विरोध जता चुका है। संगठन का कहना है कि एक विशेषज्ञ डॉक्टर को हटाने का सीधा असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है, जिसका खामियाजा अब आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मेडिसिन विभाग से जुड़े बुखार, सांस की बीमारी, शुगर, बीपी, हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रहती है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से समय पर इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें दूसरे जिलों के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे समय, पैसा और जोखिम तीनों बढ़ रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि डॉ. लोकेंद्र कश्यप के सेवा समाप्ति आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और साथ ही जनहित को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल में शीघ्र मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति की जाए।

यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में जांजगीर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर और अधिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ेगा।

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