


जांजगीर–चांपा। नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ न्यायालय ने कड़ा संदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जांजगीर प्रवीण मिश्रा की अदालत ने धारा 185 मोटर यान अधिनियम के एक मामले में दोषी पाए गए अभियुक्त को जुर्माने के साथ सामुदायिक सेवा का दंड सुनाया है।


प्रकरण क्रमांक 1120/2026 (छत्तीसगढ़ राज्य बनाम गुरु गोविंद) में अदालत ने अभियुक्त पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अभियुक्त को 15 दिनों तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया गया है। यह सेवा दिनांक 23 मई 2026 से प्रारंभ होगी। अदालत के आदेशानुसार अभियुक्त को प्रतिदिन जिले के विभिन्न चौक–चौराहों पर आम नागरिकों को शराब का सेवन न करने एवं शराब पीकर वाहन न चलाने के प्रति जागरूक करना होगा। यह सामुदायिक सेवा यातायात विभाग जांजगीर के माध्यम से कराई जाएगी।


न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अभियुक्त प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक सेवा में उपस्थित रहेगा। उसकी उपस्थिति की नियमित पंजिका संधारित की जाएगी तथा सेवा अवधि पूरी होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इस सामुदायिक सेवा की निगरानी के लिए उप पुलिस अधीक्षक विजय पैकरा को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया है। किसी भी स्तर पर आदेश के उल्लंघन की स्थिति में इसकी सूचना सीधे न्यायालय को दी जाएगी।
न्यायालय के इस निर्णय को सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे समाज में यह संदेश गया है कि नशे में वाहन चलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आमजन के जीवन के लिए गंभीर खतरा भी है।





