

जांजगीर-चांपा। जैजैपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटेतरा में पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक पुरानी पत्थर खदान में अवैध रूप से राखड़ (फ्लाई ऐश) डंप कर दिया गया है, जो अब बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। खदान में पहले से पानी भरा हुआ था, जिसके ऊपर राखड़ डाल दिए जाने से पूरा क्षेत्र दलदल में तब्दील हो गया है।


सबसे चिंताजनक बात यह है कि न तो राखड़ डंप करने वाले ट्रांसपोर्टर द्वारा और न ही जमीन मालिक की ओर से किसी प्रकार की घेराबंदी, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था की गई है। राखड़ से ढकी खदान में नीचे भरे पानी का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे जानवर पानी समझकर उसमें उतर जाते हैं और दलदल में फंस जाते हैं।
शिकारीनार निवासी एक किसान ने बताया कि उसकी तीन भैंसें चरने के लिए निकली थीं, जो दो दिनों तक वापस नहीं लौटीं। तलाश के दौरान खदान के पास पहुंचने पर उसने देखा कि दो भैंसें राखड़ और पानी के दलदल में बुरी तरह फंसी हुई थीं और पानी पीने के लिए तड़प रही थीं।
मामले की जानकारी मिलते ही कोटेतरा के सरपंच ने तत्परता दिखाते हुए ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद भैंसों को सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते रेस्क्यू नहीं होता तो बड़ा हादसा हो सकता था और बेजुबान जानवरों की मौत तय थी।
इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि पर्यावरण विभाग, बिलासपुर के अधिकारी बिना स्थल निरीक्षण किए ही राखड़ डंपिंग की अनुमति दे रहे हैं। जबकि नियमों के अनुसार राखड़ डंपिंग स्थल पर घेराबंदी, चेतावनी संकेतक और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है, जो यहां पूरी तरह से नदारद हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी ट्रांसपोर्टर, जमीन मालिक तथा अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से किसी भी बेजुबान की जान न जाए।


जंहा जंहा भी राखड़ डंप के बाद मिट्टी मुरुम फिलिग नही हुई है , उस पर जांच करवा कर उक्त ट्रांसपोर्टर को नोटिस भेजा जाएगा। और मिट्टी मुरुम फिलिग कराई जाएगी – अरुण सोम, SDM सक्ति …









