



जांजगीर-चांपा। जिले में एलपीजी गैस की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार की घोषणा के मुताबिक 25 दिनों में गैस आपूर्ति का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि उपभोक्ताओं को तय समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। मंगलवार को जैसे ही गैस से भरी ट्रक चांपा रोड पहुंची, उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और सिलेंडर लेने के लिए लोग बीच सड़क में ही लाइन लगाकर खड़े हो गए।


बताया जा रहा है कि बीते दिनों जिन उपभोक्ताओं ने गैस रिफिलिंग के लिए नंबर लगाया था, उनका नंबर मंगलवार को आया। लंबे इंतजार के बाद गैस मिलने की सूचना पर ग्राहक बड़ी संख्या में पहुंच गए, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। किसी तरह लाइन लगाकर उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित किए गए। गौरतलब है कि जिले में पहले से ही एलपीजी गैस की किल्लत बनी हुई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जिला मुख्यालय में Indane गैस की मुख्य एजेंसी नहीं है। यहां केवल HP Gas की एजेंसी संचालित है। वहीं इंडेन गैस उपभोक्ताओं को धुरकोट ग्रामीण, औरईकला ग्रामीण और चांपा की एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जिन उपभोक्ताओं ने पहले ग्रामीण एजेंसियों से अपने गैस कनेक्शन लिए हैं, उन्हें अब भी गांव जाकर रिफिलिंग करानी पड़ रही है। धुरकोट क्षेत्र के ग्राहक धुरकोट गांव जाकर गैस भरवा रहे हैं, जबकि औरईकला के उपभोक्ताओं के लिए एजेंसी संचालक ने चांपा रोड पर अस्थायी वितरण केंद्र बनाया है। मंगलवार को इसी वितरण केंद्र पर गैस ट्रक पहुंचने के बाद भारी भीड़ जमा हो गई।


गैस एजेंसी संचालकों को घर पहुंच सेवा देना अनिवार्य है, लेकिन फिलहाल यह सेवा उपभोक्ताओं को नसीब नहीं हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब गैस की किल्लत नहीं थी, तब एजेंसियां घर पहुंच सेवा देती थीं। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात (अमेरिका-ईरान युद्ध काल) के दौरान गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, घर पहुंच सेवा बंद कर दी गई।
ग्राहकों का आरोप है कि वे अतिरिक्त शुल्क देने को भी तैयार हैं, इसके बावजूद एजेंसी संचालक घर पहुंच सेवा देने से कतरा रहे हैं। इसके चलते उपभोक्ताओं को बार-बार एजेंसी और वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर गैस किल्लत और अव्यवस्थित वितरण व्यवस्था के कारण जांजगीर-चांपा जिले में उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब लोगों की मांग है कि प्रशासन और गैस कंपनियां मिलकर जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारें, ताकि बीच सड़क पर लाइन लगाने जैसी स्थिति दोबारा न बने।









